रायपुर। छत्तीसगढ़ में माताओं और नवजात बच्चों की मौत के मामलों को कम करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी है। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) रोडमैप 2030’ पर काम शुरू किया है। रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में सुरक्षित प्रसव, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और आपात स्थिति में समय पर इलाज की व्यवस्था बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। खास तौर पर प्रदेश के 12 प्राथमिकता वाले जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्यशाला अंतरराष्ट्रीय संस्था JHPIEGO के तकनीकी सहयोग से आयोजित की। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करना है, जिसे जिलों की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से लागू किया जा सके। कार्यशाला में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के साथ बेहतर कामकाज के तरीकों और मैदानी अनुभवों को भी साझा किया गया।
12 जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला में बेमेतरा, बीजापुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी), कोंडागांव, महासमुंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, नारायणपुर, राजनांदगांव और सरगुजा को प्राथमिकता वाले जिलों के रूप में शामिल किया गया।
इन जिलों की प्रथम संदर्भन इकाइयों (FRU), जिला अस्पतालों (DH) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसके लिए जिला स्तर पर अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने की रणनीति पर चर्चा हुई, ताकि स्थानीय जरूरतों के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जा सके।
गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक बेहतर देखभाल
सुमन रोडमैप के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान और उसके बाद बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर फोकस रहेगा। इसमें प्रसव पूर्व जांच (ANC), अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव और प्रसव के बाद मां व नवजात की देखभाल (PNC) को मजबूत करना शामिल है।
इसके साथ ही जटिल प्रसव और दूसरी आपात स्थितियों में समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रथम संदर्भन इकाइयों को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। इन केंद्रों पर जरूरी सुविधाओं और इलाज की उपलब्धता बेहतर होने से गंभीर स्थिति में गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार देने में मदद मिल सकती है।
जिलों में जवाबदेही और समन्वय पर भी जोर
कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। तकनीकी विशेषज्ञों और सामुदायिक स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं की भागीदारी से योजनाओं को जमीन पर लागू करने की रणनीति बनाई गई।
इस पहल के तहत जिला कार्ययोजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयास केवल कागजों तक सीमित न रहें और जरूरतमंद महिलाओं तक उनका लाभ पहुंच सके।
मेडिकल कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवाएं आयुक्त-सह-संचालक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन संचालक संजीव कुमार झा के निर्देशन में कामकाज को आगे बढ़ाया गया। मातृ स्वास्थ्य की संयुक्त संचालक डॉ. निर्मला यादव और उपसंचालक डॉ. स्मृति देवांगन ने भी कार्यशाला का नेतृत्व किया।
इसमें एम्स रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, प्रदेश के 10 शासकीय और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों के संबंधित विभागाध्यक्ष, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला RCH नोडल अधिकारी, ब्लॉक नोडल अधिकारी और FOGSI के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इसके अलावा WHO, UNICEF, JHPIEGO, Nutrition International, KPMG, IPAS, Piramal Foundation, Wadhwani AI, Azim Premji Foundation, ARMANN और YosAid जैसी संस्थाओं के राज्य प्रमुखों ने भी हिस्सा लिया। कार्यशाला में शामिल प्रतिनिधियों ने वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।
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