Dharm Desk – दीपावली से एक दिन पहले छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर आज शाम यमराज के नाम का दीपक जलाया जाएगा। शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाकर परिवार की लंबी आयु और निरोगी काया की कामना की जाती है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस बार चतुर्दशी तिथि दो दिन होने के कारण छोटी दिवाली और अभ्यंग स्नान के सयम को लेकर भी लोगों में असमंजस है। ऐसे में जानिए 7 नवंबर को यम दीपक किस समय जलाना है। इसकी पूजा विधि क्या है और दीपक जलाते वक्त कौन सा मंत्र बोलना चाहिए।
कितने बजे जलाएं यम का दीपक
पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर शनिवार को सुबह 10.47 मिनट से शुरू होगी और 8 नवंबर रविवार को सुबह 11.27 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि होने के कारण 7 नवंबर की शाम यम दीपदान किया जाएगा।
यम दीपदान का शुभ मुहूर्त: शाम 5:37 बजे से रात 8:10 बजे तक। यमराज के नाम का दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्रार्थना कर सकते हैं।

छोटी दिवाली पर यम दीपक जलाने की विधि
शाम को घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई करें।
मिट्टी का एक चौमुखा दीपक लें और उसमें सरसों या तिल का तेल भरें। दीपक में चार बत्तियां लगाएं।
दीपक के नीचे थोड़े साबुत चावल यानी अक्षत रखें।दीपक जलाकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें। हाथ जोड़कर यमराज का ध्यान करें और परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु की प्रार्थना करें।
यम दीपक जलाते समय बोलें ये मंत्र
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इस मंत्र का जप करते हुए यमराज से परिवार के सदस्यों की रक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना करें।
छोटी दिवाली पर क्यों जलाते हैं यम दीपक
पौराणिक कथा में वर्णन है कि एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। विवाह के बाद जब वह रात आई तो उसकी पत्नी ने घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषणों का ढेर लगा दिया। दीपकों की रोशनी और आभूषणों की चमक से यमराज का ध्यान भटक गया। इस तरह राजकुमार के प्राण बच गए। इसी कथा से जुड़ी मान्यता के चलते कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीप दान किया जाता है। यह दीपक परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु से बचाने और उनकी लंबी आयु की कामना का प्रतीक है।

