राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का महापर्व विजयादशमी पारंपरिक उल्लास और शौर्य के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राज्य शासन के निर्देशानुसार प्रदेशभर में शस्त्र-पूजन के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कल (विजयदशमी के पावन पर्व पर) आर्थिक राजधानी इंदौर में आयोजित मुख्य शस्त्र-पूजन कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे और शस्त्रों की पूजा-अर्चना करेंगे।
शस्त्र-पूजन का महत्व और परंपरा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए शस्त्र-पूजन के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि- विजयादशमी और शस्त्र-पूजन: विजयादशमी पर शस्त्र पूजन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य की विजय, शक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक के रूप में किया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने और रावण का वध करने से पहले अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की थी, जिससे उन्हें विजयश्री प्राप्त हुई थी।
शौर्य और राष्ट्र रक्षा का संकल्प: भारतीय परंपरा में शस्त्र पूजन केवल हिंसा का प्रतीक नहीं, बल्कि शस्त्रों को शक्ति, साहस, आत्मरक्षा, धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध संकल्प लेने का माध्यम माना गया है। यह हमारी सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के शौर्य तथा राष्ट्र रक्षा के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
प्रदेश के सभी जिलों में होंगे कार्यक्रम
राज्य शासन के निर्णय के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विजयादशमी पर विशेष शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मंत्रियों की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति: शासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले शस्त्र-पूजन कार्यक्रमों के लिए मंत्रिमंडल के मंत्रीगणों को मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है, जो अपने निर्धारित जिलों में शस्त्र-पूजन करेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी: जिन जिलों में मंत्रीगण उपस्थित नहीं रह पाएंगे, वहाँ संबंधित जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा विधि-विधान से शस्त्र-पूजन किया जाएगा
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