Business Desk – China Gold Buying : मिडिल ईस्ट में तनाव, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इस दौरान चीन का केंद्रीय बैंक सोने की लगातार खरीदारी कर रहा है। अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने करीब 7.4 लाख औंस सोना खरीदा। यह पिछले तीन साल में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी बताई जा रही है।

चीन में सोने की खरीदारी सिर्फ केंद्रीय बैंक तक सीमित नहीं है। वहां आम लोग भी बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में चीन का सोना आयात 1,000 टन तक पहुंच गया। ऐसे में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच चीन की खरीदारी पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

क्या सोने की गिरावट का फायदा उठाना चाहिए?

सोने की कीमतों में दबाव के बीच चीन लगातार खरीदारी कर रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा गिरावट निवेश के लिए बेहतर मौका है। हालांकि, केवल चीन की खरीदारी या कीमतों में गिरावट के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

‘रिच डैड पुअर डैड’ किताब के लेखक और निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी भी सोने, चांदी और बिटकॉइन जैसे विकल्पों में निवेश की वकालत करते रहे हैं। हालांकि, इन संपत्तियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। निवेश से पहले अपनी जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

चीन का गोल्ड रिजर्व कितना हो गया?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 23 महीनों से सोने की खरीदारी कर रहा है। सितंबर में हुई खरीदारी के बाद चीन का कुल गोल्ड रिजर्व बढ़कर 77.47 मिलियन औंस हो गया।

जुलाई और अगस्त में भी चीन ने सोना खरीदा था, लेकिन सितंबर की खरीदारी पिछले तीन साल की सबसे बड़ी मासिक खरीदारी रही। केंद्रीय बैंक का लगातार सोना खरीदना उसके विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

केंद्रीय बैंक डॉलर की जगह सोने को क्यों दे रहे हैं तरजीह?

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने रूस के केंद्रीय बैंक की कई विदेशी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था। इसके बाद कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और किसी एक मुद्रा पर निर्भरता कम करने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया।

सोना किसी दूसरे देश की देनदारी नहीं होता। इसी वजह से कई केंद्रीय बैंक इसे अपने रिजर्व का अहम हिस्सा मानते हैं। चीन भी सोने की खरीदारी बढ़ाने के साथ अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहा है। हालांकि, किसी देश की रिजर्व रणनीति में बदलाव के पीछे कई आर्थिक और राजनीतिक कारण हो सकते हैं।

चीन में आम लोग भी कर रहे सोने की खरीदारी

चीन में सोने की मांग बढ़ने की एक वजह आम लोगों की खरीदारी भी है। आर्थिक अनिश्चितता के बीच कुछ निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं। केंद्रीय बैंक की खरीदारी और आम लोगों की मांग मिलकर चीन के सोना बाजार को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, सोने की कीमतें सिर्फ चीन की खरीदारी से तय नहीं होतीं। अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरें, वैश्विक तनाव, निवेशकों की मांग और दूसरे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी कीमतों पर असर डालती है। इसलिए सोने में निवेश करने से पहले बाजार के इन कारकों को समझना जरूरी है।