पटना। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मचे सियासी घमासान और आंतरिक मतभेदों के बाद अब मामला सड़कों पर आ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आज यानी 2 अक्टूबर से देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का ऐलान किया गया है। विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
पटना और मुंबई में सड़कों पर उतरे छात्र और दल
आज इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत क्षेत्रीय स्तर पर हो चुकी है:
- पटना में छात्र मार्च: आज दोपहर 12 बजे पटना के गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति से ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला जाएगा। इस प्रदर्शन में ज्ञानेश इट्स डन ब्रो! जैसे अनोखे नारों के साथ विरोध दर्ज किया जाएगा, जिसमें भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के भी शामिल होने की पूरी उम्मीद है।
- मुंबई में विरोध: दूसरी तरफ, मुंबई में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ द्वारा भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा।
’इंडिया ब्लॉक’ का 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी आंदोलन
विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़े आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की है:
- जिला स्तर पर प्रदर्शन: कांग्रेस समेत 19 विपक्षी पार्टियों ने मिलकर 2 से 8 अक्टूबर तक देश के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ और जिला मजिस्ट्रेट (DM) ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
- चुनाव आयोग का घेराव: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई विपक्षी दलों की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, आगामी 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकालेंगे और आयोग का घेराव करेंगे।
राष्ट्रपति से मुलाकात और रैलियां
विपक्ष इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं है और उसने आने वाले हफ्तों के लिए भी कई बड़े कार्यक्रम तय किए हैं:
- राष्ट्रपति से गुहार: अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल देश के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुनाव आयोग के कामकाज पर ज्ञापन सौंपेगा।
- रैलियों का दौर: वोट चोरी के आरोपों को लेकर 1 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्ष की 5 बड़ी रैलियां भी आयोजित की जाएंगी।
क्या है पूरा विवाद? जिसकी वजह से गरमाई सियासत
यह पूरा विवाद 23 सितंबर को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई है।
संधू और जोशी का मुख्य आरोप यह है कि चुनाव आयोग के कई महत्वपूर्ण फैसले और आदेश उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही ले लिए गए। उन्होंने आयोग के कुछ कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ करार दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि इन सभी आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दी गई थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के चार महीने बाद 9 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की एक बैठक भी हुई थी, लेकिन उस बैठक में क्या चर्चा हुई और क्या निष्कर्ष निकला, इसका कोई आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।

