कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी 2 अक्टूबर से मुंबई में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। CJP ने इस दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन, कई राज्यों तक फैलेगा आंदोलन

मुंबई प्रेस क्लब में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि CJP का पहला प्रदर्शन 2 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि CEC इस्तीफा नहीं देते हैं, तो अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

CJP की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं:

  1. CEC के खिलाफ जांच: पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए जाने और मामले की जांच कराने की मांग की है।
  2. 2025 की वोटर लिस्ट फ्रीज हो: CJP ने मांग की है कि 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज किया जाए और उसी के आधार पर चुनाव कराए जाएं। दीपके ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में आगे बदलाव किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
  3. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता: पार्टी का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इसमें सिविल सोसाइटी की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठे सवाल

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल भी पहले सवाल उठा चुके हैं। विवाद के बीच ऐसी खबरें सामने आई थीं कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। कुछ मामलों में आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों के बीच स्पष्ट किया है कि तीन सदस्यीय आयोग ने SIR सहित सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं।

4 अक्टूबर को MNS और शिवसेना (UBT) का मार्च

मुंबई में चुनाव आयोग और SIR को लेकर विरोध के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) भी 4 अक्टूबर को मार्च निकालने वाली हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के आसार हैं।

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