हेमंत शर्मा, इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर पहुंचे, जहां वे सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में शामिल हुए। कॉन्क्लेव में देश-विदेश से आए विशेषज्ञ, उद्योगपति और सोया क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि सोयाबीन उद्योग की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

कॉन्क्लेव में सोयाबीन की मौजूदा फसल की स्थिति, बाजार के रुझान, मूल्य परिदृश्य, प्रोसेसिंग तकनीक और व्यापार नीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य सोयाबीन उत्पादकों, प्रोसेसर्स और व्यापार से जुड़े लोगों को बदलते बाजार के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उद्योग की चुनौतियों पर मंथन करना है। कार्यक्रम में सोपा के अध्यक्ष नरेश गोयनका और सोपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डेविश जैन सहित सोया उद्योग से जुड़े कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख फूड बास्केट बताते हुए कृषि और सोयाबीन उत्पादन में प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और देश के कुल उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत बताई जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सोयाबीन उत्पादकों और प्रोसेसिंग उद्योग से जुड़े लोगों के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं। इससे कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण और व्यापार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उद्योगों के अनुकूल नीतियों और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्थाओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच पुराने और आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए दोनों राज्यों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

इंदौर में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब सोयाबीन की फसल, बाजार भाव, प्रसंस्करण क्षमता और व्यापार नीतियां किसानों से लेकर उद्योग जगत तक के लिए अहम विषय बने हुए हैं। कॉन्क्लेव में होने वाला विचार-विमर्श सोया उद्योग की भावी दिशा और क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

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