दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को त्यागराज स्टेडियम में निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए आर्थिक सहायता कार्यक्रम और गांवों से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के 15,706 बच्चों के लिए 12.40 करोड़ रुपये से अधिक की पढ़ाई से जुड़ी सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की। साथ ही, दिल्ली के दो गांवों में नए बने पंचायत घरों का उद्घाटन किया गया।

इसके अलावा 37 गांवों में 59 नई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत 134 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित हजारों श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली केवल इमारतों और सड़कों से नहीं बनती, बल्कि श्रमिकों के श्रम से बनती है। जो हाथ दिल्ली को गढ़ते हैं, उनकी सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की जिम्मेदारी हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

कार्यक्रम में दिल्ली के श्रम एवं रोजगार मंत्री कपिल मिश्रा, दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजकुमार चौहान, श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत पर काम कर रही है, जिसका अर्थ है समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सशक्त बनाना। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन को साझा करते हुए कहा कि सत्ता हमारे लिए सुख भोगने का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने श्रमिकों के कल्याण के लिए जमा भारी सेस फंड का कभी सही उपयोग नहीं किया। पिछली सरकारों की नजर कभी गरीबों पर नहीं पड़ी, लेकिन हमारी सरकार ने अपने 365 दिन दिल्ली के लिए पसीना बहाने वाले मजदूर साथियों को समर्पित किए हैं। जब श्रमिक मजबूत होगा, तभी दिल्ली मजबूत बनेगी।

वित्तीय सहायता योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (डीबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी) पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता योजना चला रहा है, ताकि आर्थिक तंगी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने। इस योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को 500 रुपये/माह, 9वीं और 10वीं के छात्रों को 700 रुपये/माह, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को 1,000 रुपये/माह और स्नातक स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों को 3,000 रुपये/माह की सहायता दी जाती है। वहीं आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल और एमबीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले छात्रों को 10,000 रुपये/माह तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

श्रमिक कल्याण एवं श्रम सुधार

दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी देश में सर्वाधिक स्तर पर निर्धारित की गई है, जिसमें अन स्किल्ड श्रमिकों के लिए 18,456 रुपये, सेमी स्किल्ड श्रमिकों के लिए 20,371 रुपये और स्किल्ड श्रमिकों के लिए 22,411 रुपये प्रतिमाह तय किए गए हैं। राज्य में 44 से अधिक श्रम कानूनों को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। श्रमिकों की सहायता के लिए 155214 हेल्पलाइन की शुरुआत की गई है। इसके अलावा, 36 लाख से अधिक असंगठित श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है। बाल श्रम के विरुद्ध चलाए गए 72 विशेष अभियानों के माध्यम से 1,028 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है।

दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड की पहल

दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड का पुनर्गठन कर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों को नई गति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत 776 परियोजनाओं के प्रस्ताव दिए गए, जिनकी अनुमानित लागत 1715.05 करोड़ रुपये है। इनमें से 705 परियोजनाओं को 1,556 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही, 702 परियोजनाओं के लिए प्रथम किश्त के रूप में 157 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से सड़क, तालाब, पार्क, श्मशान घाट, चौपाल, पुस्तकालय और सामुदायिक भवनों का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में दिल्ली के गांवों की उपेक्षा हुई, जिसे बदलने के लिए सरकार ने पहले ही बजट में 1000 करोड़ का प्रावधान किया था। आज 705 परियोजनाओं के माध्यम से गांवों में सड़कों, चौपालों, बारात घरों, ओपन जिम और पार्कों का निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम देने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रमिक कल्याण, शिक्षा और ग्रामीण विकास इन तीनों स्तंभों पर कार्य कर दिल्ली को विकसित दिल्ली और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सेवा के संकल्प के साथ श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पिछले वर्षों में श्रमिकों से जुड़े विभागों के कार्य ठप पड़े थे। लेकिन अब तेजी से सुधार किया जा रहा है। दिल्ली के सभी लेबर कोर्ट को ई-कोर्ट में परिवर्तित किया जा रहा है। निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया तेज की गई है, स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, आधुनिक टूल और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला श्रमिकों को 24 घंटे किसी भी शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से रुके विकास कार्य अब व्यापक स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं, जिनमें से कई का उद्घाटन और शिलान्यास आज किया गया।

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