चंडीगढ़। पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए मान सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ सरकार ने ESMA लागू कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान और उनकी सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मीडिया को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार को मरीजों की भारी चिंता है। यदि नर्सिंग स्टाफ जल्द काम पर नहीं लौटता, तो आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लोगों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, इसलिए सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों पर ESMA लगाने का निर्णय लिया है।
हड़ताल का प्रभाव और वर्तमान स्थिति
मोहाली सहित पंजाब के तीन प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लगभग 1,500 नर्सिंग कर्मचारी इस समय काम छोड़कर प्रदर्शन कर रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण अस्पतालों में मरीजों को भारी दिक्कतों और खजजल-खुआर (परेशानी) का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के सख्त आदेश और ESMA लागू होने के बावजूद, नर्सिंग एसोसिएशन ने फिलहाल काम पर लौटने से इनकार कर दिया है और अपना संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है।

क्यों हो रही है हड़ताल? ये है मुख्य मांगें
यूनाइटेड नर्स एसोसिएशन ऑफ पंजाब के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन 26 मार्च से शुरू हुआ है। उनकी मुख्य मांगें हैं कि नर्सें 4,600 रुपये ग्रेड पे को दोबारा लागू करने की मांग कर रही हैं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रमनजीत सिंह गिल का कहना है कि यह हड़ताल अचानक नहीं की गई है। नर्सिंग स्टाफ पिछले 5-6 वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहा है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
क्या है ESMA?
ESMA यानी अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून के तहत सरकार कर्मचारियों को अनिवार्य सेवाओं (जैसे स्वास्थ्य) के लिए काम पर लौटने का आदेश देती है। यदि कर्मचारी इसके बाद भी काम पर नहीं लौटते, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
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