Coal Scam : रायपुर। कोयला घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 28 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न विशेष अनुमति याचिकाओं (आपराधिक) पर सुनवाई करते हुए ईओडब्ल्यू-एसीबी छत्तीसगढ़ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मामलों में अभियुक्तों को पूर्व में दी गई अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में परिवर्तित करते हुए उन्हें नियमित जमानत प्रदान की है।

यह अंतरिम जमानतें ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी और ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर से संबंधित हैं, जिनमें कथित कोयला घोटाला और डीएमएफ मामलों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। न्यायालय ने यह भी संज्ञान में लिया कि अभियुक्तों ने पहले ही लंबी अवधि की न्यायिक हिरासत भुगती है तथा अधिकांश मामलों में अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं और मुकदमे प्रारंभिक अवस्था में हैं।

इन मामलों में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को बड़ी राहत मिली है। उनके विरुद्ध राज्य की एजेंसियों द्वारा दर्ज प्राथमिकी तथा प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रारंभ की गई कार्यवाहियों में, ईओडब्ल्यू/एसीबी की प्राथमिकी क्रमांक 03/2024, दिनांक 17.01.2024 (कोयला प्रकरण) में 23.05.2024 को गिरफ्तारी के पश्चात लगभग 9 माह 10 दिवस की हिरासत उपरांत 03.03.2025 को, प्रवर्तन निदेशालय की ईसीआईआर क्रमांक आरपीजो/09/2022, दिनांक 29.09.2022 (कोयला प्रकरण) में 02.12.2022 को गिरफ्तारी के पश्चात लगभग 1 वर्ष 9 माह 23 दिवस की हिरासत उपरांत 25.09.2024 को, तथा ईओडब्ल्यू/एसीबी की प्राथमिकी क्रमांक 02/2024, दिनांक 16.01.2024 (डीएमएफ प्रकरण) में 03.03.2025 को गिरफ्तारी के पश्चात लगभग 2 माह 26 दिवस की हिरासत उपरांत 29.05.2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम जमानत प्रदान की गई थी, जिसे अब न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निष्पक्ष एवं प्रभावी अन्वेषण के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अंतरिम जमानत के दौरान लगाई गई शर्तें यथावत लागू रहेंगी, जो सौम्या चौरसिया, रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी और समीर विश्नोई पर लागू होंगी।

शर्तों के अनुसार अभियुक्तों को अपने पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने होंगे तथा न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। विचारण लंबित रहने की अवधि के दौरान वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर निवास करेंगे और केवल सुनवाई की तिथि से एक दिन पूर्व, व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता होने पर ही राज्य में प्रवेश करेंगे। वे संबंधित क्षेत्राधिकार के पुलिस थाने को अपना संपर्क विवरण उपलब्ध कराएंगे तथा आगे अन्वेषण के लिए बुलाए जाने पर जांच में सहयोग करेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय ने कोयला और डीएमएफ प्रकरणों से संबंधित ईओडब्ल्यू/एसीबी प्राथमिकी एवं ईडी की ईसीआईआर में अन्य सह-अभियुक्तों, जिनमें हेमंत जायसवाल, चंद्र प्रकाश जायसवाल, संदीप कुमार नायक, वीरेंद्र कुमार जायसवाल (उर्फ मोंटू), रजनीकांत तिवारी, दीपेश टोंक, राहुल कुमार सिंह, शिव शंकर नाग, रोशन कुमार सिंह, शेख मोइनुद्दीन कुरैशी, परेख कुर्रे, लक्ष्मीकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, निखिल चंद्राकर, नवनीत तिवारी, राधेश्याम मिर्झा, वीरेंद्र कुमार राठौर, भुवनेश्वर सिंह राज, भरोसा राम ठाकुर, मनोज कुमार द्विवेदी तथा माया वेरियर शामिल हैं। सभी को पूर्व में प्रदान की गई जमानत को भी जारी रखा है।

इन मामलों में 03.03.2025, 29.05.2025, 01.05.2025, 05.08.2025, 12.09.2025, 19.09.2025, 24.09.2025, 25.09.2024 और 10.12.2025 को अंतरिम जमानत प्रदान की गई थी।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि अधिकांश मामलों में अन्वेषण एजेंसियों द्वारा अनुपूरक आरोप-पत्र अथवा अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं, और आरोप अब तक तय नहीं हुए हैं और विचारण लंबित है। अंतरिम जमानत की पुष्टि से यह सिद्धांत पुनः स्थापित हुआ है कि मुकदमे के पूर्व चरण में, विशेषकर जब अभियुक्त लंबी अवधि की हिरासत भोग चुके हों, निरंतर कारावास उचित नहीं है।

इसके अतिरिक्त, यह भी उल्लेख किया गया कि जयचंद कोशल से संबंधित एक नवीन प्रकरण, जो आज सूचीबद्ध था। उसे दिनांक 29.01.2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे, अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा के साथ उपस्थित रहे।