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रायपुर. गांधी जी कहते थे कि उन्हें इस बात का मलाल रहा कि वे इस देश के आदिवासियों के लिए कुछ विशेष नही कर पाए. इसके लिए उन्होंने अपने प्रिय साथी ठक्कर बाबा को इस काम में प्रोत्साहित किया. गांधी के आंदोलनों के दौरान अक्सर बहुत से बहुत से वॉलेंट्रीयर्स गांधी को लिखते थे कि वो लोग उनके साथ काम करना चाहते थे. गांधी जी कहते थे इंतज़ार करो, वक्त आने पर बुलाऊंगा. कई लोगों ने ये स्वीकार किया कि उन्हें ये बुलावा गांधी जी के बाद मिला. उसी तरह सरगुजा की डॉक्टर बियाट्रिस को गांधी जी का ये निमंत्रण गांधी जी के जाने के 25 साल बाद मिला और केरल से झारखंड होते हुए बियाट्रिस सरगुजा आईं और दीन दुखियों के इलाज में अपना जीवन लगा दिया.

सिस्टर बियाट्रिस यानि डॉ अन्नाम्मा माडूकाइल लूका. केरल की रहने वाली डॉक्टर बियाट्रिज़ 80 साल की उम्र तक मरीजों के इलाज करती रहीं. कोरोना की वजह से जब वे इलाज नहीं कर पा रही थीं तो मरीज़ों की काउंसलिंग कर रही हैं. अब उम्र की वजह से इलाज नहीं कर पा रही हैं तो मरीजों के लिए प्रार्थना कर रही हैं. जिन लोगों को उनके इलाज से लाभ हुआ है. वे उन्हें देवी कहते हैं. डॉ बियाट्रिस चार दशक तक आदिवासी अंचल में दीन-दुखियों को अच्छा इलाज मुहैया कराती रहीं. उन्होंने अपने जीवन में एक लाख से ज़्यादा ऑपरेशन करके उन्हें जीवन दिया. इस बात पर आज यकीन करना मुश्किल है कि डॉक्टर बियाट्रिस से इलाज कराने के लिए किसी समय में रींवा, बिहार, नागपुर, बिहार और पूर्वी यूपी से इलाज कराने अंबिकापुर आते थे.

डॉ बियाट्रीस का जन्म केरल में 1939 में हुआ. उन्होंने 1970 में सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज, बंगलौर से एमबीबीएस पूरा किया और सीएमसी वेल्लोर में इंटर्नशिप और हाउस सर्जन के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, 1976 की सामान्य सर्जरी में स्नातकोत्तर हासिल किया. इसके बाद ये होलीक्रास जशपुर आईं फिर दो साल स्विट्जरलैंड में गेस्ट डॉक्टर के रूप में अनुभव हासिल किया. यहां इन्हें ट्रामा, ऑर्थो, जनरल सर्जरी, बाल रोग विज्ञान, मूत्रविज्ञान, प्लास्टिक सर्जरी. पुनर्निर्माण सर्जरी, एंडोस्कोपी और आईसीयू देखभाल, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का अनुभव हासिल हुआ. ये सारा ज्ञान और अनुभव लेकर वो एक बार फिर सरगुजा आईं और यहीं की होकर रह गईं. इस बीच वो ऑस्ट्रेलिया गईं. वहां सिडनी और मेलबोर्न में प्लास्टिक सर्जरी, जीएल और जनरल सर्जरी में वर्ष 1976 में एसआर किया. उसके बाद उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में बेहतरीन चिकित्सा सेवाओं का लाभ दिया.

बियाट्रिस ने वक्त पड़ने पर पेड़ के नीचे क्लीनिक लगाकर लोगों का इलाज करने से परहेज नहीं किया. डॉ बियाट्रिस की खूबी रही है कि मामला कितना भी जटील रहा हो. उन्होंने कभी किसी मरीज़ को लौटाया नहीं. उसका इलाज करके ठीक किया. डॉ बियाट्रिस मरीज़ों के लिए प्रार्थना भी करती हैं.

मिशन अस्पताल में दूसरे डॉक्टर बियाट्रिस को आदर्श मानते हैं. बियाट्रिस को देखकर उन लोगों ने अपने कार्यों में सुधार किया. डॉक्टर बियाट्रिस को यहां कई दशक बीत गए. वह लोगों की सेवा में अपना जीवन यापन कर रही हैं. वो जानती थीं कि सरगुजा एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. यहां मेडिकल सुविधाओं की कमी है इसलिए उनकी सबसे ज़्यादा ज़रुरत यहां है.