सुनिए देव… सुनिए…! निर्दयी सिस्टम ने मार डाला… हाँ-हाँ… मार डाला. मार डाला उन्हें जो तंत्र के बीच फंसे हैं… जो बचाने की गुहार लगा रहे हैं. जिनकी करुण पुकार सुनी नहीं जा रही.

जो बता-बता के थक चुके हैं… हम मध्यान्ह भोजन बनाने वाले हैं… हम स्कूलों में बच्चों को खाना बनाकर खिलाने वाले हैं… लेकिन 66 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर आप ही बताइए अपने परिवार को क्या खिलाए ? जीए की मर जाए. बताइए प्रभु करें तो क्या करें…? लड़े… और लड़ते-लड़ते सिस्टम से मर जाए. जैसे मर गईं दो महिलाएं… हमारी माता, हमारी बहनें.

सुन तो रहे हैं न ! हमारी करुण पुकार… लगा रहे हैं जहां करीब एक महीने से गुहार. अगर नहीं तो, अब सुन लीजिए हमारी पीड़ा, दुख भरे चीत्कार. आप तो अब आयोजन-प्रायोजन, उत्सवों से मुक्त हो गए होंगे.
कृपया जल्द से जल्द नवा रायपुर तूता धरना स्थल पर जाइये. जिस हद तक हो सके मांग पूरी कीजिए और हड़ताल समाप्त करवाइए. दामन पर महापाप का दाग न लगने दीजिए.
तूता में हर रात भारी है. खुले आसमान के नीचे धरना जारी है. जहां बेबसी है… लाचारी है… नरक जैसी स्थिति है… पसर चुकी बीमारी है.. इस बीमारी को महामारी न बनने दीजिए. आपके हाथ में सबकुछ है. कृपया अतिशीघ्र कुछ कीजिए.
भेजिए किसी को तत्काल राहत के लिए, मदद के लिए… बिगड़ते हुए हालात के लिए. ताकि बेहरम सिस्टम में कोई रहम हो सके. हजारों आंदोलनकारियों के लिए कुछ बेहतर करम हो सके.
दुख और विपदा के बीच संकट हरिए… कुछ तो ऐसा करिए… जिससे हड़ताल खत्म कराई जा सके. जान बचाई जा सके. कोई न कोई उपाय सुझा लीजिए.
हे अधिनायक ! निवेदन है कि तंत्र में फंसे हुए जन-गण-मन को बचा लीजिए… बचा लीजिए… बचा लीजिए !
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


