आदिवासी किसके?… बीजेपी के बाद अब कांग्रेस भी आदिवासियों को साधने में जुटी, कांग्रेस मुख्यालय में हो रही बड़ी बैठक, कमलनाथ बोले- समाज के नए बच्चों को आगे बढ़ाना है

राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में इन दिनों एक सवाल राजनीति गलियारे में खूब गूंज रही है….. आदिवासी किसके है? आदिवासी बीजेपी के हैं या कांग्रेस के। आदिवासियों को साधने में दोनों दल कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बीजेपी के बाद अब कांग्रेस आदिवासियों को साधने में जुट गई है। कांग्रेस मुख्यालय में आज आदिवासी नेताओं की बड़ी बैठक हो रही है।

Congress is busy in cultivating tribals

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बैठक में आदिवासी वोटर्स को साधने रणनीति बनाने पर मंथन हो रहा है। बैठक में पार्टी कार्यकर्तओं को डोर टू डोर भेजने की रणनीति पर भी मंथन होगा। बैठक के महत्व का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि खुद पीसीसी चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) इसका नेतृत्व कर रहे हैं।  प्रदेश कांग्रेस के सभागार में आदिवासी विधायकों की बैठक हो रही है।

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कमलनाथ आदिवासी समाज के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज के नए बच्चों को आगे बढ़ाना है। आदिवासी समाज बहुत जल्दी गुमराह हो जाता है। आज जो लोग बैठक है, उनमें से कई कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं और कुछ आम इंसान है जो अपने समाज को आगे बढ़ाने यहां आए हैं।

जानिए क्यों पड़ी आदिवासियों को साधने की जरुरत 

इसकी शुरुआत होती है कि पिछले महीने हुए विधानसभा उपचुनाव से। जोबट विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की सुलोचना रावत कांग्रेस प्रत्यासी को एकतरफा मुकाबले में बड़े अंतर से हराया था। जोबट विधानसभा आदिवासी बेल्ट में आता है। यहां प्रत्याशिय़ों की जीत और हार आदिवासी वोटर्स ही तय करते हैं। आजादी के बाद से आदिवासियों को कांग्रेस का वोटर्स माना जाता है। लेकिन विधानसभा उपचुनाव में आदिवासी क्षेत्र में कांग्रेस की हार ने पार्टी को सकते में डाल दिया। इससे साफ हो रहा है कि कांग्रेस के वोटर्स रहे आदिवासी अब उनसे दूर जा रहे हैं।

पिछले दिनों भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नामकरण बहादुर गोंड रानी कमलापति के नाम पर किया था। राजनीतिक पंडितों ने इसे आदिवासियों को साधने का सबसे बड़ा कदम बताया था। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अब आदिवासियों के जननायक टंट्या मामा (Tantya Mama Railway Station) के नाम पर करने का एलान किया है। इतना ही नहीं प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और चौराहे का नाम सीएम ने “भारतीय रॉबिन हुड” के नाम से मशहूर टंट्या भील के नाम पर करने का एलान किया था।

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