मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘घंटा’ बयान को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा को घेर रही है। कई जिलों में मंत्री और बीजेपी का कड़ा विरोध हो रहा है। इसी कड़ी में अनूपपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए हाथों में ‘घंटा’ लेकर मंत्री दिलीप जायसवाल के घर का घेराव किया। वहीं छिंदवाड़ा में  सांसद के घर के सामने कांग्रेस घंटा नहीं बजा पाई। सत्कार तिराहे से ही उन्हें लौटना पड़ा।

अनूपपुर में घंटा लेकर प्रदर्शन

नयामुद्दीन अली, अनूपपुर। इंदौर दूषित पानी कांड को लेकर आज अनूपपुर जिले के बिजुरी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुर्दाबाद के लगाए नारे और हाथों में घंटी लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम कर किया हंगामा भाजपा मंत्री दिलीप जायसवाल के घर का घेराव करने की कोशिश की। इस दौरान  पुलिस ने बैरिकेड लगाकर कार्यकर्ताओं को रास्ते में ही रोक दिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रही। कांग्रेस ने कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर थाना भेजा। 

सांसद के घर के सामने घंटा नहीं बजा पाई कांग्रेस  

शरद पाठक, छिंदवाड़ा। शहर में कांग्रेस के किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन को प्रशासन की सख्ती के चलते बीच में ही रोक दिया गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता सांसद के निवास के सामने ‘घंटा बजाओ’ आंदोलन करने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें सत्कार तिराहे पर ही रोक लिया। मौके पर भारी मात्रा में प्रशासनिक और पुलिस बल मौजूद रहा। इसके अलावा संसद के आवास से पहले ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आगे न बढ़ने के लिए चेतावनी दी एवं सांसद के पक्ष में नारे लगाए।

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया था। सत्कार तिराहे पर पुलिस बल पहले से तैनात था। जैसे ही कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया और सांसद निवास की ओर जाने की अनुमति नहीं दी। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सरकार के दबाव में प्रशासन आवाज़ दबाने का काम कर रहा है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

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