शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश में डॉ मोहन यादव सरकार की बड़वानी में पहली कृषि कैबिनेट पर कांग्रेस ने सवाल उठाए है। मामले को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र की प्रतिलिपि पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजी गई है।

जीतू पटवारी ने लिखा- आज “कृषि कैबिनेट” जनजातीय अंचल बड़वानी में हो रही है, तो सवाल भी ज़मीन से ही उठने चाहिए! इस तर्क के साथ की इनके जवाब भी अब बहुत जरूरी हो गए हैं!

पहले संकट में आए खेत-खलिहान

  1. गेहूं कटकर मंडियों में आ चुके हैं, लेकिन सरकारी खरीद की पुख्ता व्यवस्था अब तक क्यों नहीं? क्या किसानों को फिर से औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर किया जाएगा?
  2. गेहूं, सोयाबीन और धान के लिए बढ़ी हुई MSP का वादा किया गया था! वह पूरी कीमत किसानों को कब और कैसे मिलेगी? क्या यह भी सिर्फ झूठी घोषणा बनकर रह जाएगी?
  3. प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी दबाव में की गई ट्रेड डील से सस्ते कृषि उत्पाद देश में आएंगे, मप्र के किसानों को नुकसान से बचाने की राज्य सरकार की ठोस रणनीति क्या है? क्या कोई राज्य स्तरीय प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया गया है?
  4. प्राकृतिक आपदाओं, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और मुआवज़े का भुगतान समय पर क्यों नहीं हो पा रहा? कितने किसानों के दावे लंबित हैं?
  5. कृषि लागत लगातार बढ़ रही है! खाद, बीज, डीज़ल और बिजली महंगी हो चुकी है। क्या सरकार इन इनपुट लागतों को कम करने के लिए कोई विशेष राहत पैकेज लाएगी?

अब प्रताड़ित आदिवासी समाज

  1. मप्र से लगभग 2 लाख बच्चियां लापता बताई जा रही हैं, तो उनमें 50–58 हजार तक आदिवासी बच्चियों की संख्या क्यों है? क्या सरकार जिलेवार श्वेतपत्र जारी करेगी?
  2. सरकारी नौकरियों में आदिवासी वर्ग के बैकलॉग पद आज भी खाली क्यों हैं? राज्य सेवा और पुलिस भर्ती में कितने ST पद अभी भी रिक्त हैं? इन्हें भरने की समय-सीमा क्या है?
  3. आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्तियां समय पर क्यों नहीं मिल रहीं? कितने विद्यार्थियों की राशि लंबित है और भुगतान कब होगा?
  4. NCRB आंकड़ों में आदिवासी समाज के खिलाफ अपराधों में प्रदेश शीर्ष पर क्यों है? इसे रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना क्या है?
  5. आदिवासी नेता प्रतिपक्ष को “औकात में रहने” की धमकी देने वाले कैबिनेट मंत्री पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जनजातीय सम्मान केवल मंचीय घोषणा है?

बड़वानी केवल कैबिनेट स्थल नहीं, यह प्रदेश की आत्मा का जनजातीय चेहरा है! यदि “कृषि कैबिनेट” सचमुच किसान और आदिवासी के नाम पर है, तो आज घोषणाएं नहीं, ज्वलंत सवालों के जवाब चाहिए!

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