जयपुर | विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘समता संवर्धन विनियम 2026’ के खिलाफ राजस्थान में विरोध की आग तेज हो गई है. सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार देते हुए प्रदेश के कई जिलों में रैलियां निकालीं और प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा.

जोधपुर में प्रेस वार्ता: 1 फरवरी को चक्का जाम की चेतावनी
जोधपुर में सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता कर इस कानून की निंदा की. ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कन्हैयालाल पारीक ने कहा कि यूजीसी के नए प्रावधान समानता के नाम पर समाज को भीतर से विभाजित करने की साजिश हैं.
- बड़ी घोषणा: पदाधिकारियों ने 1 फरवरी को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है.
- समर्थन: उन्होंने दावा किया कि व्यापारिक संगठनों और ’36 कौमों’ के लोगों ने इस आंदोलन को सफल बनाने का आश्वासन दिया है.

कोटा और अलवर में जबरदस्त प्रदर्शन
विप्र फाउंडेशन के बैनर तले सवर्ण समाज ने सर्किट हाउस से कलेक्ट्री तक विशाल रैली निकाली. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भुवनेश्वर शर्मा ने कहा कि 13 जनवरी को जारी यूजीसी की अधिसूचना से सामाजिक टकराव की संभावना बढ़ गई है. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
अलवर (राजगढ़): यहाँ सवर्ण समाज ने “UGC काला कानून वापस लो” की तख्तियों के साथ शहर में जुलूस निकाला. ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने अपील की कि सामान्य वर्ग के लोग जातियों में न बंटें और अधिकारों के लिए एकजुट रहें. यहाँ एसडीएम सीमा मीणा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया.
क्या है विवाद की जड़?
करणी सेना के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह नरुका के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु पारित विनियम 2026” में धर्म, जाति, नस्ल और लिंग के आधार पर कुछ ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों का हनन करते हैं.
विरोध के मुख्य बिंदु:
- भेदभाव का आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये नियम समानता के बजाय हिंदू समाज को वर्गों में बांटने का काम करेंगे.
- भय का माहौल: संगठनों का तर्क है कि शैक्षणिक संस्थानों में इन नियमों के लागू होने से सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अवसर सीमित हो जाएंगे.
इन संगठनों ने संभाली कमान
राजस्थान के इस आंदोलन में विप्र फाउंडेशन, करणी सेना, ब्राह्मण महासभा और सवर्ण समाज के कई स्थानीय संगठन प्रमुखता से शामिल हैं. करौली और धौलपुर सहित अन्य जिलों में भी ज्ञापन देने का सिलसिला जारी है.
सवर्ण संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अधिसूचना रद्द नहीं हुई, तो राजस्थान के साथ-साथ दिल्ली में भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा.
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