बिलासपुर। देवकीनंदन सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर बिलासपुर में 4 नवंबर को सहकारिता विभाग की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बिलासपुर एवं मुंगेली जिले की सहकारी समितियों के प्रबंधकों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का शुभारंभ बिलासपुर संभाग के संभागायुक्त एवं कलेक्टर बिलासपुर ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभागायुक्त सुनील जैन ने कहा कि सहकारिता और लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने बताया कि भारत में वर्ष 1904 में पहली कृषि सहकारी समिति की स्थापना हुई थी। सहकारिता व्यवस्था को मजबूत बनाने में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहम भूमिका है। उन्होंने पैक्स (प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति) के कंप्यूटरीकरण को पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसकी उपयोगिता और आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही आगामी धान खरीदी में समिति कर्मचारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने तथा खरीदी की तैयारियों को समय रहते पूरा करने के निर्देश दिए।

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी को सुचारू और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर जोर दिया। उन्होंने धान उपार्जन केंद्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश देते हुए समितियों को अपनी व्यवस्थाएं समय पर दुरुस्त रखने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने कोऑपरेटिव फार्मिंग, बायोफर्टिलाइजर, बायोगैस और फाइनेंशियल मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने देश-दुनिया की सफल सहकारी समितियों के बेहतर प्रयासों से सीखने, उन्हें समझने और अपनी समितियों में लागू करने की आवश्यकता बताई।
प्रशिक्षण कार्यशाला में बसंत कुमार संयुक्त आयुक्त, चंद्रशेखर जायसवाल उपायुक्त सहकारिता बिलासपुर, सहायक आयुक्त मुंगेली, खाद्य नियंत्रक बिलासपुर सहित विभाग के विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे। तीन मास्टर ट्रेनरों ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में समितियों के प्रबंधकों एवं पदाधिकारियों को विभागीय कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, प्रबंधन और आगामी धान खरीदी की तैयारियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। कार्यशाला में शामिल समिति कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों ने प्रशिक्षण की सराहना करते हुए इसे सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और जिम्मेदारियों को समझने की दिशा में उपयोगी पहल बताया।
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