संजय पाटीदार, भोपाल। कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की। महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने जिम्मेदारी दी, लेकिन कोरोना का संकट खत्म होते ही इन कोरोना वॉरियर्स से रोजगार छिन गया। अब यही कोरोना वॉरियर्स अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में इनका प्रदर्शन जारी है।

करीब 4 हजार स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति कोरोना काल में की गई थी, लेकिन बाद में उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। रोजगार की बहाली के लिए अब प्रदर्शनकारी आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। कोई मुंडन कराकर विरोध जता रहा है, तो महिलाएं केशदान कर सरकार का ध्यान खींच रही हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की दो टूक है कि जब तक रोजगार वापस नहीं मिलेगा आंदोलन खत्म नहीं होगा।

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मध्यप्रदेश में इन कोरोना वॉरियर्स के नियमितीकरण को लेकर राजनीति पारा हाई है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि कोरोना काल में कोरोना वॉरियर्स डाक्टरों ने जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की और दो साल तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। आज उन्हें नौकरी से बाहर करना उनके साथ अन्याय है। सरकार को फैसला बदलकर उन्हें नियमित करना चाहिए।

इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रवक्ता धैर्यवर्धन सिंह ने कहा कि कोरोना काल में सरकार ने अस्थायी बजट प्रावधान कर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की थी। स्वास्थ्य विभाग अब सेवा मापदंडों के अनुसार काम करता है। कोरोना काल में सेवा देने वालों को अनुभव के आधार पर भविष्य में अवसर दिए जाएंगे।

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