साकेत कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर की रहने वाली युवतियों के खिलाफ कथित तौर पर नस्लभेदी टिप्पणियां और गालियां देने के आरोपी एक कपल को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत में सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज समर विशाल ने कहा कि आरोपी रूबी जैन उर्फ़ नीरज जैन और हर्ष प्रिया सिंह को 13 अप्रैल तक अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है। कोर्ट ने यह आदेश उस अंडरटेकिंग के बाद दिया जिसमें कपल ने कहा कि वे 31 मार्च को या उससे पहले उस जगह को खाली कर देंगे, जहां वे फिलहाल रह रहे हैं। अदालत ने यह शर्त इसलिए रखी ताकि पीड़ित युवतियों और आरोपियों के बीच किसी भी तरह का टकराव न हो।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज समर विशाल ने कहा कि आरोपी रूबी जैन उर्फ़ नीरज जैन और हर्ष प्रिया सिंह को 13 अप्रैल तक अंतरिम जमानत दी जाती है। कोर्ट ने यह आदेश इस शर्त पर दिया कि कपल 31 मार्च तक या उससे पहले उस जगह को खाली कर देगा, जहां वे वर्तमान में रह रहे हैं, ताकि पीड़ितों के साथ किसी भी तरह के टकराव से बचा जा सके। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के व्यवहार की प्रकृति निंदनीय थी, लेकिन मौजूदा समय में उन्हें लगातार जेल में रखने से कोई खास फायदा नहीं होगा। साथ ही अदालत ने कहा कि जांच बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े, इसके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस का आरोप

दिल्ली पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान दंपति ने मुद्दे को शांतिपूर्वक सुलझाने के बजाय पीड़ित युवतियों और मौके पर मौजूद एक इलेक्ट्रीशियन को गाली देना शुरू कर दिया। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं के बारे में नस्लीय रूप से अपमानजनक टिप्पणियां कीं और पीड़ितों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ **भारतीय न्याय संहिता के कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं रूबी जैन पर **अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी केस दर्ज किया गया है।

 ‘पक्षपातपूर्ण भाषण राष्ट्रीय एकता को कमजोर करता है’

मामले पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि भले ही इस घटना में कोई शारीरिक हिंसा नहीं हुई, लेकिन जाति या पहचान के आधार पर किया गया अपमान गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल किसी व्यक्ति को आहत करती हैं बल्कि भारत के विविधतापूर्ण समाज को बनाए रखने वाले भाईचारे और आपसी सम्मान के मूल्यों को भी कमजोर करती हैं।

कोर्ट ने कहा कि पक्षपातपूर्ण भाषण राष्ट्रीय एकता को कमजोर करता है और उस सिद्धांत को चोट पहुंचाता है कि मानव सम्मान समान और अविभाज्य है। अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जो भाषा किसी की पहचान या विरासत का मजाक उड़ाती है, वह न केवल संयम की कमी बल्कि नागरिक संवेदनशीलता की भी कमी दर्शाती है। इसलिए नागरिकों को गुस्से के क्षणों में भी संयम बरतना चाहिए। भाषण में शिष्टाचार सामाजिक शांति का पहला प्रहरी है।”

क्या है मामला

यह विवाद मालवीय नगर, दक्षिण दिल्ली में रहने वाले आरोपी दंपति और उनके तीन पड़ोसियों के बीच हुआ था, जो अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद 21 फरवरी को शुरू हुआ, जब पीड़ितों के किराए के मकान की चौथी मंजिल पर एयर कंडीशनर लगाने का काम चल रहा था। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे के फ्लोर पर गिर गया, जहां आरोपी दंपति रहते थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

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