कुंदन कुमार, पटना। महात्मा गांधी की जयंती के पावन अवसर पर बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गई, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले ने बड़े पैमाने पर ‘संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुला आक्रोश था, जिसे पार्टी ने ‘वोट चोरी’ की गंभीर साजिश करार दिया है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
गांधी जयंती के इस ऐतिहासिक दिन पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से एक बड़ा मार्च निकाला गया। इस मार्च में भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य के साथ-साथ पार्टी के हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में पार्टी के लाल झंडे और ज्वलंत मुद्दों को दर्शाती तख्तियां थीं, जिन पर सरकार विरोधी और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़े नारे लिखे हुए थे।
SIR और वोटर लिस्ट से नाम काटने का गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं और नेताओं ने मुखर होकर आरोप लगाया कि देश में एक सोची-समझी साजिश के तहत लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। माले का मुख्य आरोप है कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन या संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया) के नाम पर देश और खासकर राज्यों से करीब 65 लाख नागरिकों के नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से काटे जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यह सीधा-सीधा भारत के संविधान और लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दीपंकर भट्टाचार्य का कड़ा बयान
मीडिया से बातचीत करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया और उनके विचारों को याद करते हुए वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के दिन बापू के आदर्शों को जीवित रखते हुए देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की सख्त जरूरत है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वोट की चोरी सीधे तौर पर लोकतंत्र की चोरी है, और इस नाइंसाफी के खिलाफ देश के कोने-कोने से आवाज उठाई जा रही है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों के मताधिकार छीनने का यह सिलसिला बंद नहीं हुआ, तो यह विरोध प्रदर्शन और अधिक तीव्र किया जाएगा। इस मार्च ने एक बार फिर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पटना की सड़कों पर गूंजे इन नारों ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और आने वाले दिनों में यह एक राष्ट्रीय बहस का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

