Business Desk :- Crude Oil Price Crash : क्रूड ऑयल की कीमतें काफी समय बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को सुबह 8:52 बजे ब्रेंट क्रूड 0.58% की गिरावट के बाद 98.653 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं WTI क्रूड की कीमत 1% गिरकर 89.603 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की बढ़ती संभावना और सऊदी अरब में बंद तेल पाइपलाइन की बहाली को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

6 कारोबारी सत्र से लगातार गिर रहा क्रूड
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना जैसे-जैसे बढ़ी है, वैसे-वैसे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। पिछले करीब 6 कारोबारी सत्र से Crude Oil में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बाजार में Supply को लेकर बनी चिंता का कम होना है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है और तेल सप्लाई से जुड़ी रुकावटें कम होती हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसी उम्मीद का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
Saudi Arabia की तेल पाइपलाइन फिर शुरू
सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल पाइपलाइन ड्रोन हमलों के कारण बंद कर दी गई थी। अब इसे दोबारा बहाल कर दिया गया है। इस पाइपलाइन की क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है।
पाइपलाइन के दोबारा शुरू होने से तेल सप्लाई बढ़ने की उम्मीद बनी है। हालांकि, अभी यह पाइपलाइन अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर रही है। इसके बावजूद बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव कुछ कम हुआ है, जिसका असर Crude Oil Prices पर पड़ा है।
अमेरिका-ईरान के बीच क्या बातचीत हुई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है। उनके मुताबिक बातचीत सार्थक रही है और आगे भी जारी रहेगी।
बातचीत में मुख्य मुद्दों में से एक Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच इस मार्ग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें उसकी मांग है कि पहले अमेरिका को नाकाबंदी हटानी होगी, ताकि ईरान का तेल निर्यात दोबारा शुरू हो सके। ईरान के मुताबिक जब तक वाशिंगटन उसकी शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करता, तब तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकती।
अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाया गया है। इसमें तेल प्रवाह पर लगाई गई नाकाबंदी भी शामिल है। अब ईरान इसी नाकाबंदी को हटाने की मांग कर रहा है।
भारत को कैसे मिलेगी राहत?
कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने और कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण भारत का Import Bill पहले ही बढ़ चुका है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में Crude Oil Price में गिरावट से देश को राहत मिल सकती है।
अगर तेल की कीमतों में गिरावट आगे भी जारी रहती है, तो इससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है। महंगे कच्चे तेल से जुड़ी लागत में कमी आने पर अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है।
हालांकि, मौजूदा कीमतें अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी ऊपर हैं। इसलिए अमेरिका-ईरान बातचीत, Strait of Hormuz की स्थिति और वैश्विक तेल सप्लाई आने वाले दिनों में Crude Oil Prices की दिशा तय करने वाले अहम कारक रहेंगे।



