Business Desk : Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। हालांकि, दिन के कारोबार में इसमें मामूली तेजी रही, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान इसकी कीमत करीब 17% गिर गई।
यह कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट बताई गई है।अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी शुक्रवार को 90.83 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसमें पूरे सप्ताह करीब 13% की गिरावट रही।
भारत के लिए कच्चा तेल 2 महीने के निचले स्तर पर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की लागत 5 नवंबर को घटकर 94.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई। यह करीब दो महीने का निचला स्तर है।
30 अक्टूबर को भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 118.7 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह एक सप्ताह में इसमें करीब 20.4% की गिरावट आई है।
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से गिरे दाम़
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है। बाजार में यह संभावना बढ़ी कि पश्चिम एशिया में संघर्ष कम हो सकता है। इससे इस क्षेत्र से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद बनी है।
इसके अलावा बाजार में कच्चे तेल की मांग कमजोर होने और सप्लाई बढ़ने के संकेतों ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों से शुक्रवार को कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिली।
दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल-डीजल के दाम
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत ₹111.21 और डीजल की ₹97.83 प्रति लीटर है।
चेन्नई, बेंगलुरु और कोलकाता में भाव
चेन्नई में पेट्रोल ₹107.76 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹111.68 और डीजल ₹99.56 प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल की कीमत ₹113.51 और डीजल की ₹99.82 प्रति लीटर है। ये सभी दरें 7 नवंबर 2026 की उपलब्ध शहरवार रिपोर्ट के मुताबिक हैं।

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी घटेंगे?
कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को राहत मिल सकती है। इससे तेल कंपनियों की कच्चा तेल खरीदने की लागत घटती है और देश का आयात बिल कम हो सकता है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत घट जाएंगे। घरेलू कीमतें तय करते समय तेल कंपनियां कच्चे तेल की लागत, डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत, टैक्स और दूसरी लागतों को भी देखती हैं। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आगे कच्चे तेल की कीमतों पर क्या रहेगा असर?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान के संबंधों, पश्चिम एशिया में सप्लाई की स्थिति और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, टैंकरों पर हमले या संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल में फिर तेजी आ सकती है।

