Business Desk :- क्रूड ऑयल की कीमतों में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शुरुआती गिरावट दर्ज की गई। सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर ईरान समर्थित हूतियों के हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे आए।

हालांकि, क्षेत्र में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई पर संभावित असर को देखते हुए कीमतों में आगे उछाल की आशंका बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.97% गिरकर 102.676 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड का भाव 2% से ज्यादा गिरावट के बाद 89.997 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, सोमवार को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

आज क्रूड ऑयल की कीमतों में कितनी गिरावट?

सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड, दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.97% गिरकर 102.676 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 2% से ज्यादा गिरकर 89.997 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है। ऐसे में बाजार की नजर क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रम और तेल की सप्लाई पर पड़ने वाले असर पर है।

सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हमले से बढ़ा तनाव

रविवार को सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर ईरान समर्थित हूतियों के हमले की खबर सामने आई। इस हमले में 12 से ज्यादा लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात कही गई है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब को हूतियों के खिलाफ कार्रवाई में समर्थन देने के लिए तैयार होने की बात कही जा रही थी। ऐसे घटनाक्रम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।

ट्रंप ने रविवार को यह भी ऐलान किया कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा समझौते पर सहमत हो गए हैं। इस घटनाक्रम का तेल बाजार पर क्या असर पड़ेगा, यह आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव, तेल की सप्लाई पर खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सोहार बंदरगाह के पास एक टैंकर पर ड्रोन हमले की खबर के बाद तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई बढ़ने के बावजूद क्षेत्र में तनाव और टैंकरों पर हमलों का खतरा बना हुआ है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से अहम समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे कीमतों में तेजी आने की आशंका भी बढ़ सकती है।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों की कच्चा तेल खरीदने की लागत बढ़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक तेल महंगा रहने से देश का आयात बिल बढ़ने का जोखिम रहता है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने या बढ़ने का असर घरेलू पेट्रोल-डीजल के दामों पर तुरंत और उसी अनुपात में दिखना जरूरी नहीं है। कंपनियों की लागत, रुपये-डॉलर की विनिमय दर और अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

सोमवार, 12 अक्टूबर को सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बदलाव नहीं किया। मिडिल ईस्ट में तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच आगे बाजार की चाल पर नजर रहेगी।