Business Desk- Crude Oil Price Today : अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव के संकेतों का असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है।

गुरुवार 8 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:50 बजे WTI क्रूड 1.85% की तेजी के साथ 89.909 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड करीब 2% चढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच आई है। अगर यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव, क्रूड की कीमतों में उछाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण लंबे समय से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बीच-बीच में कीमतों में गिरावट आती है, लेकिन तनाव बढ़ते ही क्रूड में फिर तेजी देखने को मिल रही है।

अमेरिका ने पेंटागन को ईरान के खिलाफ नए हमले करने के निर्देश दिए हैं। ये हमले मध्यावधि चुनाव से पहले हो सकते हैं। इसके अलावा सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हौथियों के हमले ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है।

मेक्सिको की खाड़ी में तेल उत्पादकों ने भी कुल उत्पादन का करीब एक चौथाई हिस्सा बंद कर दिया है। हालांकि, फिलहाल यह कहा जा रहा है कि मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर तक लौट आई है। इसके बावजूद टैंकरों पर हमले का खतरा बना हुआ है।

यही वजह है कि बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए बड़ी चिंता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों को लंबे समय से महंगे कच्चे तेल के कारण दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंची रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।

महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

महंगे कच्चे तेल का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने पर ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ती है। इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च बढ़ सकता है और इसका असर खाने-पीने की चीजों समेत दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

ऐसे समय में महंगाई बढ़ने का दबाव और बढ़ सकता है। खासकर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने के साथ रोजमर्रा के खर्च भी बढ़ने लगते हैं।

RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी के बीच नई चिंता

महंगाई के बढ़ते जोखिम को देखते हुए रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं और इससे महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती और बढ़ सकती है।

फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई पर बनी हुई है। इन घटनाओं में किसी भी बड़े बदलाव का सीधा असर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।