Business Desk – Crude Oil Price Today : अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Price Today यानी कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार, 4 नवंबर को फिर तेजी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
इस बीच ब्रेंट क्रूड 104.42 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 96.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क में शुरुआती गिरावट के बाद तेजी लौटी।हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम प्रमुख शहरों में स्थिर रहे।
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर है।
पहले गिरा कच्चा तेल, फिर संभले दाम
बुधवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी। निवेशक अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों और मिडिल ईस्ट में शांति वार्ता की संभावनाओं पर नजर रख रहे थे।
Reuters के मुताबिक, भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10:40 बजे ब्रेंट क्रूड 0.8% बढ़कर 104.42 डॉलर प्रति बैरल और WTI 0.5% चढ़कर 96.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले ब्रेंट 103.21 डॉलर और WTI 95.42 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गए थे।

अमेरिका-ईरान तनाव से सप्लाई की चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव है। अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर एयर डिफेंस मिसाइलों को निशाना बनाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताया।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि फिलहाल ईरान पर नए हमले की तत्काल कोई योजना नहीं है। दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत अभी किसी समझौते तक नहीं पहुंची है। कतर दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने के लिए मध्यस्थता कर रहा है।
बाजार की चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां सप्लाई प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
अमेरिका में घटा 52.7 लाख बैरल तेल का स्टॉक
अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घटने से भी कीमतों को सहारा मिला है। American Petroleum Institute (API) के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में अमेरिका का क्रूड ऑयल स्टॉक 52.7 लाख बैरल घट गया। जबकि Reuters के सर्वे में विश्लेषकों ने इस दौरान करीब 8.80 लाख बैरल की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था। यानी वास्तविक गिरावट अनुमान से काफी ज्यादा रही। हालांकि, इसी अवधि में अमेरिका का पेट्रोल स्टॉक 14.3 लाख बैरल बढ़ा, जबकि डिस्टिलेट का भंडार 11.9 लाख बैरल घटा। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आधिकारिक स्टॉक आंकड़ों का इंतजार था।
भोपाल में पेट्रोल 114 रुपए के पार, जानिए 12 शहरों के रेट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश के प्रमुख शहरों में 4 नवंबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल 114.36 रुपए और डीजल 99.48 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया।
वहीं, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए, मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपए और डीजल 99.82 रुपए, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपए और डीजल 99.56 रुपए, हैदराबाद में पेट्रोल 116.15 रुपए और डीजल 104.23 रुपए प्रति लीटर है। जयपुर में पेट्रोल 113.19 रुपए और डीजल 98.25 रुपए, जबकि लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपए और डीजल 95.36 रुपए प्रति लीटर है।
इसके अलावा पटना में पेट्रोल 113.37 रुपए और डीजल 99.36 रुपए, अहमदाबाद में पेट्रोल 102.15 रुपए और डीजल 98.27 रुपए तथा पुणे में पेट्रोल 111.90 रुपए और डीजल 98.55 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया।
भारत पर क्यों पड़ेगा कच्चे तेल की तेजी का असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति और महंगाई पर भी पड़ सकता है। कच्चे तेल का इस्तेमाल सिर्फ पेट्रोल और डीजल बनाने में ही नहीं होता, बल्कि इससे कई पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, माल ढुलाई और उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है।
क्या बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तय करती हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, रिफाइनिंग लागत और टैक्स जैसे कारक घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल भारत के लिए अहम रहेगी।

