Business Desk – Crude Oil Price Today : अमेरिका में ट्रम्प की पार्टी को चुनावी झटका लगने और ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिलहाल बदलाव नहीं हुआ है।
Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। ब्रेंट क्रूड करीब 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड का भाव करीब 86.98 डॉलर प्रति बैरल है।
इससे पहले बुधवार को ब्रेंट क्रूड 8.7% गिरकर 94.62 डॉलर और WTI क्रूड 8.3% टूटकर 88.12 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। दोनों की कीमतें करीब दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।
ट्रम्प की पार्टी को झटका, कच्चे तेल की कीमतें क्यों गिरीं?
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है। डेमोक्रेट्स की बढ़त से ट्रम्प पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है।
बाजार को उम्मीद है कि इससे ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका पर कूटनीतिक समाधान निकालने का दबाव बढ़ सकता है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई बेहतर हो सकती है।

इसी उम्मीद से निवेशकों ने कच्चे तेल में बिकवाली की। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने या शांति समझौते की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम कितने हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद 5 नवंबर को भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
इंदौर: पेट्रोल 114.58 रुपए, डीजल 99.70 रुपए प्रति लीटर।
दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपए, डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर।
मुंबई: पेट्रोल 111.21 रुपए, डीजल 97.83 रुपए प्रति लीटर।
कोलकाता: पेट्रोल 113.51 रुपए, डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर।
चेन्नई: पेट्रोल 107.76 रुपए, डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर।
कच्चा तेल सस्ता होने पर भी पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घटे?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर तुरंत नहीं दिखता। भारत में तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, रिफाइनिंग लागत और दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखती हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट भी पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम होना जरूरी नहीं है।
भारत को कच्चा तेल सस्ता होने से क्या फायदा होगा?
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश का इंपोर्ट बिल घट सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद रहेगी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस, पेंट और केमिकल कंपनियों की लागत भी घट सकती है। ट्रांसपोर्ट खर्च कम होने पर माल ढुलाई और दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि, आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत कब मिलेगी, यह तेल कंपनियों और सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगा।
आगे कच्चे तेल की कीमतों में क्या होगा?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान के तनाव, पश्चिम एशिया से तेल की सप्लाई और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी।
अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और तेल की सप्लाई सामान्य रहती है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, सैन्य तनाव बढ़ने या सप्लाई प्रभावित होने पर कच्चा तेल फिर महंगा हो सकता है।

