Business Desk- Crude Oil Price Today : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान से कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को गिरावट दर्ज की गई। WTI क्रूड 1.26% गिरकर 90.442 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.20% घटकर 103.027 डॉलर प्रति बैरल रह गई। हालांकि, ब्रेंट क्रूड अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। अगर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की 3 वजहें
- अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ सार्थक बातचीत चल रही है। इससे तनाव कम होने की उम्मीद जगी है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ा।
- होर्मुज से सप्लाई को लेकर बयान: ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की सप्लाई रिकॉर्ड मात्रा में हो रही है। इस रास्ते से तेल की आपूर्ति बनी रहने की उम्मीद बाजार की चिंता कम कर सकती है।
- नाकाबंदी के बीच तनाव बरकरार: ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सैनिकों ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी है। वहीं, ईरान के खिलाफ संभावित हमलों की तैयारी से जुड़ी रिपोर्टें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
गुरुवार को क्रूड में करीब 5% की तेजी आई थी
शुक्रवार को कीमतें गिरने से पहले गुरुवार को कच्चे तेल में करीब 5% की तेजी दर्ज की गई थी। इसकी एक वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों की खबरें थीं।
होर्मुज दुनिया के अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की खबरों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर तेजी से दिखाई देता है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने हाल के महीनों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों की लागत और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ेंगे, यह तय नहीं है। कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय तेल के भाव के अलावा रुपये की विनिमय दर, टैक्स और सरकारी नीतियों का भी असर पड़ता है।
फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम अमेरिका-ईरान तनाव का आगे बढ़ना है। अगर होर्मुज में तेल की सप्लाई प्रभावित होती है या सैन्य कार्रवाई तेज होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है। इसके उलट, बातचीत आगे बढ़ने और सप्लाई सामान्य रहने से कीमतों को राहत मिल सकती है।

