Business Desk- Crude Oil Price Today : कच्चे तेल की कीमतों में सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी 29 सितंबर 2026, मंगलवार को भी तेजी जारी है। सुबह 7:30 बजे WTI क्रूड 1.07% की तेजी के साथ 93.579 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं Brent क्रूड 1.35% चढ़कर 106.69 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

सोमवार और मंगलवार की तेजी ने पिछले सप्ताह की गिरावट की भरपाई कर दी है। बाजार में इस तेजी की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान समझौते पर क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका में नवंबर के अंत में चुनाव होने हैं। इससे पहले ईरानी अधिकारियों ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के जल्द खत्म होने को लेकर संदेह जताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही तेहरान की ओर से रखे गए प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसकी शर्तें नहीं मानी गईं तो वह बातचीत के लिए भी तैयार नहीं होगा। ईरान की प्रमुख मांगों में तेल सप्लाई पर लगे प्रतिबंध हटाना और अमेरिका की ओर से फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना शामिल है। इन मांगों पर दोनों देशों के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है।
वार्ता में प्रगति हुई, लेकिन तस्वीर साफ नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच न्यूयॉर्क में हुई बातचीत के दौरान कुछ प्रगति के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अभी भी किसी समझौते पर स्पष्टता नहीं है। अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान के परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत में ठोस प्रगति होती है तो वह ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है।
वहीं अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर ईरान उसकी शर्तों को नहीं मानता है तो प्रतिबंधों में कोई राहत नहीं दी जाएगी। यही अनिश्चितता कच्चे तेल के बाजार में चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है और प्रतिबंधों में बदलाव का सीधा असर ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब में पाइपलाइन की सप्लाई फिर शुरू
सऊदी अरब में तेल सप्लाई करने वाली एक पाइपलाइन की मरम्मत का काम पूरा हो गया है। इसके बाद इस पाइपलाइन से तेल की सप्लाई दोबारा शुरू हो गई है। इससे सप्लाई को लेकर कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता अभी बनी हुई है।
कब मिलेगी कच्चे तेल की कीमतों में राहत?
कच्चे तेल की कीमतों में स्थायी राहत के लिए अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति सामान्य होना अहम माना जा रहा है। फरवरी के अंत से मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी हुई है और इसका असर ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर पड़ रहा है। भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव से प्रभावित होती है।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल खास मायने रखता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत में अभी पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में पिछले महीने और इस महीने पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल कम कीमत पर ईंधन बेचकर नुकसान झेल रही हैं।
हालांकि अगर ग्लोबल क्रूड की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका दबाव तेल कंपनियों के साथ आगे चलकर आम जनता के ईंधन खर्च पर भी पड़ सकता है।


