पटना। शहर के राजाबाजार स्थित एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के कुछ घंटे बाद प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उन्होंने ऑपरेशन से एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था, लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तबीयत बिगड़ने की सूचना देने के बावजूद डॉक्टर डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
दोपहर में हुआ ऑपरेशन, रात को बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार, राजलक्ष्मी को 12 तारीख को इस निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। अगले दिन यानी 13 तारीख को दोपहर करीब 3 बजे उनका सिजेरियन ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद उन्होंने 2.100 किलोग्राम वजनी बेटे को जन्म दिया। शाम करीब 7:45 बजे तक डॉक्टर ने उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई थी। हालांकि, रात लगभग 8:15 बजे अचानक उनकी तबीयत तेजी से खराब होने लगी और उनका पल्स रेट बढ़कर 162 तक पहुंच गया। परिवार ने तुरंत ड्यूटी पर मौजूद नर्सों और स्टाफ को इसकी सूचना दी, लेकिन डॉक्टर वक्त पर नहीं पहुंचे।
खुशियों का घर मातम में बदला, निष्पक्ष जांच की मांग
राजलक्ष्मी के पिता और वरिष्ठ पत्रकार केके लाल ने बताया कि वे बेटी के सुरक्षित प्रसव की उम्मीद से अस्पताल आए थे, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। राजलक्ष्मी की शादी साल 2024 में हुई थी और वह पटना सिटी के मुसल्लहपुर इलाके में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। परिवार ने केवल प्रसव के दौरान हुई घटनाओं ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के पूरे समय के दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली और बार-बार जांच के लिए दबाव बनाने के आरोपों की भी गहराई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश
घटना के तूल पकड़ने के बाद पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने मामले का संज्ञान ले लिया है। उन्होंने नर्सिंग होम की पूरी जांच कराने की बात कही है। परिजनों ने भी स्वास्थ्य विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर मौत के वास्तविक कारणों और चिकित्सा में हुई लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है, जो अस्पताल के रिकॉर्ड और चिकित्सकीय दस्तावेजों की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।

