Death of Sadhvi Prem Baisa: साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में जोधपुर पुलिस की जांच अब तीन प्रमुख लोगों के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आ रही है। इनकी मौजूदगी, भूमिका और बयानों में सामने आए विरोधाभासों ने पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना दिया है। पुलिस तीनों से अलग-अलग पूछताछ कर चुकी है और आमने-सामने बैठाकर भी बयान दर्ज किए गए हैं। अब इन बयानों का आपसी मिलान किया जा रहा है।

पहला किरदार: पिता वीरमनाथ
साध्वी प्रेम बाईसा अपने पिता वीरमनाथ के साथ जोधपुर के पाल रोड स्थित आरती नगर के साधना कुटी आश्रम में रहती थीं। पुलिस को दी गई रिपोर्ट में वीरमनाथ ने बताया कि 28 जनवरी 2026 की सुबह साध्वी को सामान्य जुकाम था। हालत गंभीर नहीं होने के कारण उन्होंने निजी क्लिनिक चलाने वाले देवी सिंह को सुबह 11:54 बजे फोन किया। देवी सिंह ने उस समय अस्पताल में होने की बात कहते हुए दोपहर तीन बजे आने को कहा।
वीरमनाथ के अनुसार शाम 5:04 बजे दोबारा कॉल किया गया और करीब 5:10 से 5:15 बजे के बीच देवी सिंह आश्रम पहुंचे। उन्होंने साध्वी से तबीयत पूछी, मशीन से जांच की और जुकाम को सामान्य बताया। इसके बाद देवी सिंह ने साध्वी के दाहिने हाथ में एक इंजेक्शन लगाया, कुछ गोलियां दीं और 500 रुपये फीस लेकर चले गए।
वीरमनाथ का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के करीब नौ मिनट बाद ही साध्वी की हालत बिगड़ने लगी। वे रोने लगीं और बार-बार कहने लगीं कि उनकी तबीयत खराब हो रही है। छींकें तेज हो गईं और कुछ देर बाद उन्होंने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की।
वीरमनाथ साध्वी को गोद में उठाकर गाड़ी से अस्पताल के लिए निकले। रास्ते में शाम 5:29 बजे उन्होंने देवी सिंह को फोन कर पूछा कि ऐसा कौन सा इंजेक्शन लगाया गया, जिससे हालत इतनी बिगड़ गई। इस पर देवी सिंह ने इंजेक्शन को सामान्य बताया और पूछा कि वे किस अस्पताल जा रहे हैं।
वीरमनाथ के अनुसार इसी दौरान साध्वी चिल्लाने लगीं कि उनकी सांस बंद हो रही है। रोते हुए उन्होंने कहा कि पापा, मैं अब हमेशा के लिए जा रही हूं और कुछ ही देर में बेहोश हो गईं। चार से पांच मिनट में उन्हें प्रेक्षा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज शुरू हुआ, लेकिन दो से पांच मिनट के भीतर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद वीरमनाथ ने देवी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई।
दूसरा किरदार: कंपाउंडर देवी सिंह
इस मामले में दूसरा अहम नाम कंपाउंडर देवी सिंह का है, जिसने साध्वी को इंजेक्शन लगाया था। पुलिस पिछले तीन दिनों से उससे लगातार पूछताछ कर रही है। देवी सिंह से उसकी नर्सिंग डिग्री, डिग्री जारी करने वाली संस्था, वर्तमान पदस्थापन, इलाज की वैधानिक अनुमति और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड के बारे में सवाल किए गए हैं।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि 28 जनवरी को साध्वी का इलाज किस आधार पर किया गया, कौन-कौन सी दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, उनकी मात्रा क्या थी और क्या इसका कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद है। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि देवी सिंह का साध्वी और उनके परिवार से पहले से कोई संबंध था या नहीं।
देवी सिंह ने पुलिस को बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से साध्वी और उनके परिवार के संपर्क में था और पहले भी कई बार इलाज के लिए आश्रम आ चुका था। उसके मुताबिक लगाए गए इंजेक्शन सामान्य प्रोटोकॉल के तहत थे और उसे फोन कर बुलाया गया था।
तीसरा किरदार: सेवादार सुरेश
तीसरा अहम किरदार आश्रम में सेवादार के रूप में काम करने वाला सुरेश है, जिसे पूरे घटनाक्रम का प्रत्यक्ष गवाह माना जा रहा है। पुलिस को दिए बयान में सुरेश ने बताया कि साध्वी 27 जनवरी की रात अजमेर से जोधपुर आश्रम पहुंची थीं। अगली सुबह उठने पर उनका गला खराब था। उन्होंने गरारे किए और दोपहर में काढ़ा भी पिया।
सुरेश के अनुसार शाम करीब पांच बजे साध्वी ने फोन कर बताया कि डॉक्टर आया है और गेट खोलने को कहा। गेट खोलने पर नर्सिंगकर्मी देवी सिंह आए और सीधे साध्वी के कमरे में चले गए। उस समय सुरेश कमरे के अंदर मौजूद नहीं था।
सुरेश ने बताया कि देवी सिंह के जाने के चार-पांच मिनट बाद ही साध्वी की चीख सुनाई दी। वह दौड़कर बाहर आया तो देखा कि साध्वी आश्रम के मुख्य द्वार के पास गिरी हुई थीं। उसी समय उनके पिता वीरमनाथ भी वहां पहुंचे। दोनों ने मिलकर साध्वी को गाड़ी में लिटाया।
अस्पताल ले जाते समय साध्वी की सांसें अटकने लगीं, जिस पर सुरेश ने सीपीआर देने की कोशिश भी की। इस दौरान साध्वी बार-बार कह रही थीं कि पापा, मुझे न्याय दिला देना। सुरेश ने यह भी बताया कि उस समय साध्वी के हाथों के नाखून नीले पड़ गए थे।
प्रेक्षा अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने साध्वी को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच के तहत आश्रम की रसोई से बुधवार सुबह तैयार किए गए भोजन के सैंपल भी जब्त किए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि वह भोजन सेवादार सुरेश ने ही तैयार किया था।
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