चंडीगढ़। हाईकोर्ट में नगर निगमों और परिषदों के वार्डबंदी को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर, 2025 के बाद जारी वार्डबंदी की सभी अधिसूचनाएं वापस लेने का निर्णय लिया है। वहीं, हाईकोर्ट ने दायर याचिकाओं को अनावश्यक बताकर निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट में याचिकाओं में नगर निकायों के वार्डबंदी की प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।
हाईकोर्ट ने 16 जनवरी के आदेश में मुख्य सचिव से स्पष्ट करने को कहा था कि क्या राज्य केंद्र के 13 अगस्त, 2025 के नोटिफिकेशन को उसमें भी खासकर वार्ड सीमाओं को 1 जनवरी से फ्रीज करने के मुद्दे को स्वीकार कर रहा है या नहीं। यदि राज्य इसे स्वीकार नहीं करता तो इस मुद्दे का निर्णय कोर्ट करेगा।
पंजाब मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि मामले को विशेष विचार के लिए केंद्र को भेजा गया है, क्योंकि 2 कम्युनिकेशन में विरोधाभास है। हलफनामे के अनुसार जनगणना नियम 1990 के तहत प्रशासनिक सीमाएं ‘सेंसस रेफरेंस डेट’ से 1 वर्ष पहले से फ्रीज नहीं की जा सकती। भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय की 16 जून, 2025 की अधिसूचना के अनुसार 2027 की जनगणना के लिए 1 मार्च, 2027 रेफरेंस डेट तय है (यानी सीमाएं 28 फरवरी, 2026 से पहले फ्रीज नहीं हो सकतीं)। 27 जून, 2025 के एक अन्य पत्र में 31 दिसंबर तक सीमाएं फ्रीज करने और 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक बदलाव न करने को कहा गया था, जो नियमों से टकराता है।

राज्य ने स्पष्ट किया कि 8 दिन की देरी जानबूझ कर नहीं, बल्कि तकनीकी कारणों से हुई। सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया कि 8 जनवरी, 2026 की अधिसूचनाओं को विशेष मामले में स्वीकार किया जाए, क्योंकि ड्राफ्ट अधिसूचनाएं 31 दिसंबर से पहले जारी की गई थी।
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