दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े बड़े साइबर फ्रॉड (fake trading app cyber fraud case) मामले में एक आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद शुरुआती सबूत बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करते हैं। कोर्ट के अनुसार, करीब 43.33 करोड़ रुपये की रकम गोल-मोल और परतदार (लेयर्ड) लेनदेन के जरिए इधर-उधर की गई, जो संगठित आर्थिक अपराध का संकेत देती है। अदालत ने माना कि इस तरह के वित्तीय अपराध का प्रभाव व्यापक होता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस गिरीश कथपालिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि पैसों की हेराफेरी का एक जटिल जाल है, जिसकी जांच अभी जारी है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे बड़े आर्थिक अपराध देश की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाते हैं। आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि उसके खाते में केवल करीब 12,100 रुपये ही आए थे, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जांच में सामने आया है कि आरोपी की फर्म के बैंक खाते में मात्र छह महीने के भीतर 43.33 करोड़ रुपये जमा हुए, जो मामले को बेहद गंभीर बनाता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े बड़े साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि जांच एजेंसियों ने बैंक खाता संचालित करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई, आरोपी की भूमिका कम नहीं हो जाती। कोर्ट ने पाया कि आरोपी संदिग्ध लेनदेन की वैधता साबित करने के लिए जीएसटी रिकॉर्ड, खरीद-फरोख्त के बिल या आयकर से जुड़े दस्तावेज भी पेश नहीं कर सका। ऐसे में अदालत ने माना कि लेनदेन की प्रकृति पर गंभीर संदेह बना हुआ है।

अदालत के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गई। यह मामला फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए लोगों से कथित ठगी और बड़े पैमाने पर पैसे की हेराफेरी से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अभी भी पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m