दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में भारतीय सेना में तैनात एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि लंबे समय तक चले रिश्ते और उसके बाद हुई रोका/सगाई जैसी पारंपरिक रस्म आरोपी के पक्ष को पहली नजर में मजबूत बनाती है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि दो लोगों के बीच लंबे समय तक संबंध रहे हों और परिवारों की मौजूदगी में रोका या सगाई जैसी रस्में भी हो चुकी हों, तो मामले के तथ्यों का मूल्यांकन करते समय इन परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि रिश्ता आपसी सहमति से था या नहीं और क्या शादी की मंशा शुरू से ही वास्तविक थी। अदालत ने इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया।

दिल्ली हाई कोर्ट के सामने पेश रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी और शिकायतकर्ता महिला के बीच करीब पांच साल तक संबंध रहे। इस दौरान दोनों के बीच लगभग दो साल तक शारीरिक संबंध भी रहे थे। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि इतने लंबे समय तक चले रिश्ते और दोनों परिवारों की सहमति से हुई रोका (सगाई जैसी पारंपरिक रस्म) इस बात की ओर संकेत करती है कि उस समय शादी की वास्तविक मंशा मौजूद थी।

क्या कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने?

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोनों के बीच हुई निजी बातचीत से यह भी सामने आया कि महिला ने खुद स्वीकार किया था कि वह आरोपी से प्रेम करती थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की बातचीत से यह संभावना भी सामने आती है कि दोनों के बीच बने शारीरिक संबंध केवल शादी के वादे पर आधारित नहीं थे, बल्कि वे आपसी सहमति से भी हो सकते हैं।

यह है पूरा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, साल 2021 में आरोपी और महिला के बीच संबंध शुरू हुए थे। बाद में आरोपी ने महिला के परिवार से शादी की बात की, जिसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से रोका (सगाई जैसी रस्म) भी किया गया और शादी की तारीख तय की गई।हालांकि महिला ने आरोप लगाया कि बाद में आरोपी और उसकी बहन ने शादी के लिए 10 लाख रुपये दहेज की मांग की। महिला का कहना है कि दहेज की मांग को लेकर विवाद के बाद शादी नहीं हो सकी और मामला कानूनी विवाद में बदल गया।

महिला का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि आरोपी किसी दूसरी जगह शादी करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। शिकायत में महिला ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो लीक करने की धमकी दी और उसके साथ मारपीट भी की। महिला का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

ट्रायल कोर्ट तय करेगा पूरा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि शुरुआती पुलिस शिकायत में रेप का आरोप नहीं लगाया गया था। अदालत ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की वास्तविक सच्चाई का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा। इसलिए फिलहाल आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है। साथ ही अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह जांच में सहयोग करे और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों के सामने पेश हो।

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