दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ प्रेम संबंध का टूटना या साथी की दूसरी जगह शादी होना किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने एक युवक को जमानत देते हुए कहा कि उकसावा इतना गंभीर होना चाहिए कि व्यक्ति के पास कोई अन्य विकल्प न बचे। मामले की सुनवाई में अदालत ने पाया कि आरोपी ने महीनों पहले युवती से बातचीत बंद कर दी थी, और युवती ने संभवतः अति-संवेदनशीलता के कारण यह कदम उठाया।

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने कहा है कि सिर्फ प्रेम संबंधों का टूटना आपराधिक कानून के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनाता। यह टिप्पणी एक ऐसे आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिस पर अपनी पूर्व प्रेमिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। मामले के अनुसार, आरोपी की पूर्व प्रेमिका ने उसकी शादी से केवल 5 दिन पहले आत्महत्या कर ली थी।

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप ऐसे मामलों में ही लगाया जाना चाहिए जब पीड़ित के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प न बचा हो। पीठ ने स्पष्ट किया कि सिर्फ मामले की सुनवाई से यह तय नहीं किया जा सकता कि मृतक युवती का कदम उकसावे का परिणाम था या वह बहुत संवेदनशील थी। अदालत ने कहा कि विस्तृत सुनवाई के बाद ही पता चलेगा कि युवती ने यह कदम क्यों उठाया।

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि इस मामले में पीड़िता का आत्महत्या से पहले कोई सुसाइड नोट या पत्र नहीं मिला। आरोपी और पीड़िता लगभग आठ साल से संबंध में थे, लेकिन इस अवधि में युवती ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। अदालत ने यह भी देखा कि आत्महत्या की तारीख से काफी पहले ही दोनों के बीच बातचीत बंद हो चुकी थी। पीठ ने कहा कि यह मामले साफ तौर पर टूटे हुए रिश्ते का उदाहरण लगता है, न कि ऐसा अपराध जिसमें आरोपी ने सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाया हो।

दिल्ली में एक मामले में युवती ने अक्टूबर 2025 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिसे लेकर परिवार ने आरोप लगाया कि यह कदम प्रेम संबंध टूटने और शादी के दबाव के कारण उठाया गया। मृतका के पिता के मुताबिक, आरोपी ने उनकी बेटी को फंसाया और शादी के लिए धर्म बदलने का दबाव डाला। काफी हद तक यह आत्महत्या तब हुई जब युवती को पता चला कि आरोपी ने किसी और से शादी कर ली है। अदालत की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आठ साल तक चले संबंध में युवती ने कभी शिकायत नहीं की, और आत्महत्या की तारीख से काफी पहले ही दोनों का संपर्क खत्म हो चुका था। आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने इस मामले में पाया कि युवती अपने दोस्तों के मुताबिक परेशान थी, लेकिन दोस्तों ने यह भी बताया कि उसने कभी धर्म बदलने का दावा नहीं किया। सुनवाई में यह सामने आया कि आरोपी ने फरवरी 2025 के बाद से युवती से बातचीत बंद कर दी थी। वहीं आरोपी ने अदालत को बताया कि दोनों के बीच करीब आठ साल तक अच्छे संबंध थे, लेकिन युवती के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे क्योंकि दोनों अलग-अलग धर्मों से थे। आरोपी ने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता ने ही उसे रिश्ता तोड़ने के लिए मजबूर किया।

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