दिल्ली स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने शुक्रवार को पाकिस्तान सेना समर्थित प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) आतंकवादी संगठन के दो ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को आरसी-11/2016/एनआईए/डीएलआई के तहत अधिकतम 15 साल की कैद की सजा सुनाई. इन पर आरोप था कि उन्होंने 2016 में कश्मीर में आतंक फैलाने के इरादे से घुसपैठ करने वाले एक भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकवादी को शरण, भोजन और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की थी.
NIA कोर्ट ने दोनों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून यानी UAPA की धारा 18 और 19 के तहत 15-15 साल की जेल की सजा सुनाई. साथ ही धारा 39 के तहत 9 साल की अतिरिक्त सजा भी दी गई
दोनों व्यक्तियों की पहचान सितंबर 2017 में की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया. एनआईए ने मार्च 2018 में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. अदालत ने 18 दिसंबर 2025 को उन्हें दोषी ठहराया और उनके खिलाफ सजा सुनाई, जिससे कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने वाले ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को भारी झटका लगा है.
दिल्ली की एनआईए कोर्ट ने 2016 के आतंकी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो ओवरग्राउंड वर्कर्स को 15-15 साल की सजा सुनाई है. दोनों पर पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक खतरनाक आतंकी की मदद करने का आरोप साबित हुआ. दोषियों की पहचान कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा निवासी जाहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर के रूप में हुई है.
कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवारा निवासी, दो आरोपियों, जिनकी पहचान जहूर अहमद पीर और नज़ीर अहमद पीर के रूप में हुई है, को यूए (पी) अधिनियम की धारा 18 और धारा 19 के तहत 15-15 साल की कैद और इसी अधिनियम की धारा 39 के तहत नौ साल की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी. दोनों पर 200 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. इनमें से प्रत्येक धारा के तहत 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिससे प्रत्येक आरोपी पर कुल मिलाकर 1,50,000 रुपए का जुर्माना बनता है.
यह केस लश्कर-ए-तैयबा की एक बड़ी साजिश से संबंधित है, जिसके तहत पाकिस्तानी नागरिक और प्रशिक्षित आतंकवादी बहादुर अली उर्फ सैफुल्लाह अन्य आतंकवादियों के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर गया था. भारी हथियारों से लैस इस आतंकवादी समूह के पास अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक, नेविगेशन उपकरण, नाइट विजन उपकरण और संचार उपकरण थे.
हालांकि, उनकी योजना विफल हो गई क्योंकि बहादुर अली को 25 जुलाई 2016 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दो अन्य घुसपैठिए आतंकवादी, अबू साद और अबू दरदा, बाद में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


