दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के शाहीनबाग पुलिस स्टेशन में तैनात एक कांस्टेबल ने अपने ही विभाग की नाक कटवा दी। पुलिस ने उसे बड़े फर्जीवाड़े में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कांस्टेबल पर आरोप है कि वह नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) बनाकर बेच रहा था। आरोपी की पहचान अरुण के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, अरुण यह फर्जी काम अपने साथी तुषार के साथ मिलकर कर रहा था। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दिल्ली पुलिस के शाहीनबाग स्टेशन में तैनात कांस्टेबल अरुण और उसके साथी तुषार द्वारा नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) बनाने का मामला तब सामने आया जब दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की नारकोटिक्स यूनिट ने एक ड्रग तस्कर आशीष को 18 ग्राम MDMA के साथ गिरफ्तार किया। आशीष से पूछताछ के बाद पुलिस ने सनलाइट कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान पर छापेमारी की। वहां जाकर पुलिस को पता चला कि कांस्टेबल अरुण और तुषार पिछले छह महीने से वहीं रह रहे थे और इसी मकान से नकली PCC बनाने और बेचने का काम किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी कांस्टेबल अरुण साल 2017 बैच का पुलिसकर्मी है और मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहने वाले हैं। वह अपने साथी तुषार की मदद से जाली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) बना रहा था। पुलिस के अनुसार, तुषार उत्तर प्रदेश के पिलखुवा का रहने वाला है और उसने पहले कई पुलिस स्टेशनों में ‘पुलिस मित्र’ के तौर पर भी काम किया था। अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों 1,000 से 2,000 रुपए लेकर कुछ ही घंटों में जाली PCC तैयार कर ग्राहकों को सौंप देते थे।
पुलिस ने बताया कि असली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच द्वारा सत्यापन के बाद ऑनलाइन जारी किया जाता है। इसकी फीस केवल 10 रुपए होती है, और पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 10 से 15 दिन लगते हैं। हालांकि आरोपी कांस्टेबल अरुण और उसका साथी तुषार कुछ ही घंटों में फर्जी PCC बनाकर लोगों को थमा देते थे। इसके बदले में वे प्रति सर्टिफिकेट 2,000 रुपए तक वसूलते थे, जो असली प्रक्रिया की तुलना में 200 गुना अधिक था।
जिले की नारकोटिक्स टीम ने आशीष नाम के कथित नशीले पदार्थों के तस्कर को पकड़ा और उसके पास से लगभग 18 ग्राम MDMA बरामद किया। पूछताछ के दौरान पुलिस ने सनलाइट कॉलोनी इलाके में आशीष से जुड़े एक किराए के मकान पर छापा मारा। मकान की तलाशी के दौरान पुलिस ने पाया कि कांस्टेबल अरुण और तुषार पिछले छह महीने से इस मकान में रह रहे थे और इसके लिए वे 35,000 रुपए प्रति माह किराया दे रहे थे। यही मकान रैकेट का मुख्य केंद्र बन गया था, जहां से दोनों जाली PCC तैयार कर ग्राहकों को बेच रहे थे।
तलाशी में बड़ी संख्या में मुहरें मिली
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सनलाइट कॉलोनी स्थित मकान की आगे की तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में जाली PCC, खाली फॉर्म और कई सरकारी दिखने वाले स्टैंप बरामद हुए। इन स्टैंपों पर कथित तौर पर दिल्ली पुलिस के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के अधिकारी और अन्य पुलिस अधिकारियों के नाम लिखे थे।
पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) क्या है?
पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है। यह प्रमाणित करता है कि आवेदक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
PCC की जरूरत कब होती है?
विदेश में रोजगार पाने के लिए वीजा आवेदन और आव्रजन प्रक्रियाओं में निजी नौकरियों में पृष्ठभूमि सत्यापन के लिए किराएदारों और संपत्ति लेन-देन के सत्यापन में PCC एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो आवेदक की साफ़-सुथरी आपराधिक पृष्ठभूमि को प्रमाणित करता है और इसे जाली बनाने या बेचने का प्रयास गंभीर अपराध माना जाता है।
कांस्टेबल पद का नकली कार्ड बनाकर घूम रहा था आरोपी
पुलिस ने सनलाइट कॉलोनी स्थित मकान की तलाशी में तुषार के नाम का नकली दिल्ली पुलिस पहचान पत्र भी बरामद किया। इस पहचान पत्र की मदद से तुषार खुद को कांस्टेबल बताकर लोगों के बीच घूमता था। जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपी अरुण और तुषार ने अब तक सैकड़ों नकली PCC बनाए होंगे, क्योंकि उनके मोबाइल फोन से भी कई ऐसे सर्टिफिकेट्स मिले हैं।
आरोपियों के फ्लैट पर विदेशी महिला भी मिली
पुलिस सूत्रों ने बताया कि बरामद नशीले पदार्थ (MDMA) के लिए भुगतान कांस्टेबल अरुण के मोबाइल के माध्यम से किया गया था। छापेमारी के दौरान किराए के मकान में पुलिस को एक विदेशी महिला भी मिली, जिस पर उज्बेकिस्तान की नागरिक होने का शक है। पुलिस फिलहाल जांच कर रही है कि यह महिला आरोपियों के साथ या ड्रग तस्करों के नेटवर्क से किस तरह जुड़ी हुई थी।
मामले में दर्ज की गईं दो अलग-अलग FIR
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर दो अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं।
पहली FIR – नशीले पदार्थों की बरामदगी के संबंध में।
दूसरी FIR – किसी और का रूप धारण करने, जालसाजी और नकली PCC बनाने के आरोप में। पुलिस ने दोनों आरोपियों कांस्टेबल अरुण और तुषार को गिरफ्तार कर मामले की जांच तेज कर दी है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

