मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत ने पूरे देश का ध्यान खींचा. राज्य की मोहर सरकार इस घटना के बाद से लगातार कतघरे में खड़ी है. अब दिल्ली में भी पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर विपक्ष ने मौजूदा रेखा सरकार पर निशाना साधा है. राजधानी में लगातार फेल हो रहे जल सैंपल और गंदे पानी की आपूर्ति ने राजधानी की तीन करोड़ आबादी के स्वास्थ्य पर खतरे की घंटी बजा दी है. इसी मुद्दे पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को कटघरे में खड़ा किया है.
पानी का सैंपल फेल होने पर सरकार से सवाल
देवेन्द्र यादव ने कहा, ”राजधानी में दूषित पानी की सप्लाई के लिए सीधे तौर पर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार जिम्मेदार है. दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत 25 टेस्टिंग लैब होने के बावजूद सिर्फ दो लैब ही ग्लोबल स्टैंडर्ड से सर्टिफाइड हैं. यह स्थिति दिल्ली की तीन करोड़ जनता के स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है.”
33 सैंपल फेल, कई इलाकों में गंदा पानी!
लगातार शिकायतों के बाद 11 से 18 दिसंबर के बीच जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) से लिए गए सैंपल में 33 सैंपल स्वच्छता मानकों पर फेल पाए गए. भलस्वा, जनकपुरी, अशोक नगर, नारंग कॉलोनी और चंदर नगर समेत कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई से लोग परेशान हैं.
इंदौर की घटना का जिक्र कर दिल्ली को चेतावनी
देवेन्द्र यादव ने आगे कहा कि भाजपा की सरकारें जनता की चिंता छोड़कर केवल अपने स्वार्थ में लगी हैं. उन्होंने इंदौर में दूषित पानी से हुई लगभग 15 मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि इस गंभीर घटना पर भाजपा नेता पूरी तरह चुप हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रेखा गुप्ता सरकार नींद से नहीं जागी तो दिल्ली में भी ऐसे हालात बन सकते हैं.
एक्रेडिटेशन की हालत बेहद खराब- देवेंद्र यादव
उन्होंने बताया, ”दिल्ली जल बोर्ड की 25 लैब में से सिर्फ हैदरपुर और वजीराबाद की लैब ही ग्लोबल स्टैंडर्ड सर्टिफाइड हैं. दिल्ली जल बोर्ड की एक प्रमुख लैब अक्टूबर में अपना एक्रेडिटेशन भी खो चुकी है. इसके कारण सही मॉनिटरिंग और पब्लिक हेल्थ को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया है.”
देवेन्द्र यादव ने ये भी कहा, ”दूषित जल की सप्लाई महज लापरवाही नहीं बल्कि खुला अपराध है. गंदा पानी पीने से लोगों की जान और माल दोनों को नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं की जा रही है.”
‘अन्य राज्यों से पीछे दिल्ली’
उन्होंने बताया कि दिल्ली में टेस्टिंग लैब का एक्रेडिटेशन रेट मात्र आठ प्रतिशत है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार तमिलनाडु, त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड में सौ प्रतिशत पब्लिक लैब एक्रेडिटेड हैं. हरियाणा में यह आंकड़ा 98 प्रतिशत, असम में 94 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 66 प्रतिशत है.
जल जीवन मिशन पर भी सवाल
देवेन्द्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जल जीवन मिशन चला रही है, लेकिन देश की राजधानी में घरों तक दूषित पानी पहुंचना केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों की विफलता दर्शाता है. यह जनता के स्वास्थ्य के प्रति असंवेदनशील रवैये को उजागर करता है.
उन्होंने कहा, ”जनकपुरी सहित कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बार-बार आदेश दे चुका है. इसके बावजूद दिल्ली जल बोर्ड लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है. इससे साफ है कि सरकार लोगों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है.”
‘यमुना में गिर रहा अनुपचारित गंदा पानी’
देवेन्द्र यादव ने आगे कहा, ”प्रदूषण, बदहाल इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक कचरे के कारण पानी की गुणवत्ता पिछले 12 वर्षों में और खराब हुई है. दिल्ली के बड़े नालों से अनुपचारित गंदा पानी सीधे यमुना में गिर रहा है. 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से करीब 28 मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया कि फेकल कॉलीफार्म, बीओडी और टीएसएस जैसे मानक फेल होने के बावजूद दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी सब कुछ सही दिखाकर डेटा मेंटेन कर रही है. यह सीधे तौर पर दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.
सरकारों की नाकामी पर कांग्रेस का हमला
देवेन्द्र यादव ने कहा कि न तो मौजूदा भाजपा सरकार और न ही पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली के घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए. उन्होंने कहा कि राजधानी में दूषित पानी की समस्या को नजरअंदाज करना आने वाले समय में बड़े स्वास्थ्य संकट को न्योता देना है.
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