दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई अब क्लासरूम से निकलकर अनुभव आधारित होती नजर आएगी। भारी-भरकम स्कूल बैग से राहत देने और बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 से कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए 10 ‘बैगलेस डे’ लागू करने का फैसला किया है। इन बैगलेस दिनों में बच्चे किताबें लाने की बजाय आर्ट, क्राफ्ट, खेल, विज्ञान प्रयोग, स्थानीय भ्रमण, स्किल-बेस्ड एक्टिविटी और ग्रुप वर्क जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम होगा और सीखने की प्रक्रिया ज्यादा रोचक व व्यावहारिक बनेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP) की सोच के अनुरूप है, जिसमें रटने के बजाय सीखने, समझने और करने पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही इससे बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 10 बैगलेस डे सिस्टम को लेकर आधिकारिक सर्कुलर जारी कर दिया है। सर्कुलर के मुताबिक यह पहल जनवरी से फरवरी 2026 के बीच पूरी की जाएगी। इस अवधि में हर हफ्ते दो दिन कक्षा 1 से 8 तक के छात्र बिना किताब और स्कूल बैग के स्कूल आएंगे। इन बैगलेस दिनों का मकसद बच्चों को केवल किताबी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग से जोड़ना है। स्कूलों में इन दिनों खेल, कला, क्राफ्ट, समूह गतिविधियां, प्रयोग, स्थानीय परिवेश से जुड़ी सीख और लाइफ-स्किल एक्टिविटीज कराई जाएंगी, ताकि बच्चे देखकर, समझकर और करके सीख सकें।

शिक्षा विभाग से मिलेगी मदद

स्कूलों में बैगलेस डे के दौरान पढ़ाई का माहौल पूरी तरह अलग होगा। इन खास दिनों में बच्चों के लिए नुक्कड़ नाटक, क्विज प्रतियोगिता, साइंस एक्सपेरिमेंट, कुकिंग कॉम्पिटिशन, गार्डनिंग और अलग-अलग ग्रुप एक्टिविटीज कराई जाएंगी। इसका मकसद बच्चों को खेल-खेल में टीमवर्क, कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसे ज़रूरी लाइफ स्किल्स सिखाना है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह कॉन्सेप्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत शुरू किया गया था और पिछले साल इसकी शुरुआत की गई थी। इस बार सभी स्कूलों को पहले से बेहतर प्लानिंग के साथ इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को इसका पूरा लाभ मिल सके।

इस पहल को मजबूत बनाने के लिए समग्र शिक्षा, दिल्ली की ओर से हर स्कूल को 13,500 रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। इस राशि का इस्तेमाल स्टेशनरी, फोटोकॉपी, बैनर और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री खरीदने में किया जाएगा। कुल मिलाकर, बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों के लिए पढ़ाई को हल्का, रोचक और अनुभव आधारित बनाना है।

अगल-अलग ऐज ग्रुप के इंतजाम

सीएम श्री स्कूल से जुड़े प्रिंसिपल अवधेश झा के मुताबिक, इस बार बैगलेस डे को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए बच्चों को दो अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है। जूनियर ग्रुप में कक्षा 1 से 5 तक के छात्र शामिल हैं। इनके लिए फैंसी ड्रेस, नुक्कड़ नाटक और फिजिकल एक्टिविटीज जैसी रचनात्मक और खेल आधारित गतिविधियां रखी गई हैं, ताकि बच्चे मज़े-मज़े में सीख सकें।

वहीं सीनियर ग्रुप, यानी कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए पढ़ाई से जुड़ी सब्जेक्ट-बेस्ड क्विज, लैब प्रैक्टिकल और लाइब्रेरी रीडिंग सेशन आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य सीनियर छात्रों को विषयों की बेहतर समझ देना और उनकी सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत करना है। प्रिंसिपल का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में न सिर्फ सीखने की रुचि बढ़ती है, बल्कि वे आत्मविश्वास, टीमवर्क और प्रेजेंटेशन स्किल्स भी विकसित करते हैं।

ताकि पढ़ाई बोझ न लगे

मंगोलपुरी स्थित गवर्नमेंट सर्वोदय बाल विद्यालय के प्रिंसिपल रणवीर सिंह दलाल बताते हैं कि उनके स्कूल में एक बैगलेस डे सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस दौरान जूनियर कक्षाओं के बच्चों को स्कूल कैंपस में पेड़-पौधों के बारे में जानकारी लेने और गार्डनिंग जैसी गतिविधियों में शामिल किया गया, जिससे वे प्रकृति से जुड़कर सीख सकें। वहीं सीनियर छात्रों को लाइब्रेरी सहित स्कूल के अलग-अलग हिस्सों को एक्सप्लोर करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे सीखने के माहौल को बेहतर तरीके से समझ सकें और आत्मनिर्भर ढंग से ज्ञान अर्जित करें।

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