दिल्ली की वोटर लिस्ट के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने बड़ी संख्या में मतदाताओं को भेजे गए ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिस पर सवाल उठाते हुए आयोग से इसकी स्पष्ट व्याख्या करने को कहा है। अदालत ने यह भी पूछा कि करीब 33 लाख नोटिसों के निपटारे के लिए कितने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तैनात किए गए हैं।

‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नोटिस पर कोर्ट के सवाल

RTI कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में जारी नोटिस पहली नजर में मशीन से तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि 33 लाख से अधिक मतदाताओं को मामूली या अस्पष्ट कारणों के आधार पर नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कुछ नोटिसों में मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के बीच 15 साल से कम अंतर को आधार बनाया गया है, जबकि आयोग द्वारा मांगे गए 12 दस्तावेजों में माता-पिता की उम्र से संबंधित जानकारी शामिल नहीं है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने बताया कि करीब 14 हजार BLO और 1,200 ERO लगातार काम कर रहे हैं। मतदाताओं को जवाब देने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया है और जरूरत पड़ने पर समयसीमा बढ़ाई जा सकती है। आयोग ने अदालत को आश्वस्त किया कि किसी भी मतदाता का नाम उचित कारण के बिना वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के सुझाव

चीफ जस्टिस ने कहा कि मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए हर प्रकार की आपत्ति के लिए मानक जवाब और स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जा सकते हैं। जस्टिस बागची ने BLO को वार्ड कार्यालयों में उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। आयोग ने बताया कि सहायता के लिए कैंप और WhatsApp ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं।

दिल्ली SIR में कितने नाम प्रभावित?

31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 97.53 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ नाम थे। लगभग 47.56 लाख नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणियों के कारण ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए।

वहीं करीब 33 लाख मतदाता ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में हैं। इनमें करीब 13.80 लाख 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट से मैप नहीं हो पाए, जबकि लगभग 19.33 लाख को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में रखा गया है।

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