कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्यप्रदेश में NHM के सपोर्टिंग स्टाफ कर्मचारियों के वेतन में सेंधमारी का मामला अब CBI तक पहुंच सकता है। NHM संविदा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने CM डॉ मोहन यादव को पत्र के जरिए धांधली की CBI से जांच कराने की मांग की है।

कोमल सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी के हित में प्रदेश भर में वित्तीय वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 के बीच कर्मचारियों के वेतन में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है। ऐसे में प्रदेश के सभी जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जन,अस्पताल अधीक्षक द्वारा किन शर्तों पर आउटसोर्स एजेंसियों से अनुबंध किया और कितना मानदेय कर्मचारियों को दिया गया इसकी जांच होनी चाहिए।

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भ्रष्टाचार में बड़े-बड़े अधिकारी लिप्त

कोमल सिंह के अनुसार इस भ्रष्टाचार में बड़े-बड़े अधिकारी लिप्त हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब NHM संविदा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के जरिए इस धांधली का मुद्दा उठाया गया तो उसके बाद NHM के CEO ने सभी जिलों से आदेश जारी कर आउटसोर्स कर्मचारी के वेतन से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन भ्रष्टाचार को छुपाने प्रदेश भर के CMHO, सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक द्वारा जानकारी नही भेजी जा रही है। इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच की मांग CM से की है।

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अलग-अलग मानदेय का भुगतान

गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में सपोर्टिंग स्टाफ को असमान वेतन मिल रहा है। प्रदेश में कलेक्ट्रेट रेट (अर्धकुशल श्रमिक दर ) 12796 रुपये है। जबकि प्रदेश भर में आउटसोर्स सपोर्ट स्टाफ कर्मचारियों को अलग-अलग मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। कुछ जिलों में दो से तीन आउटसोर्स एजेंसियां भी काम कर रही हैं। ऐसे में एक ही काम के लिए कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन भुगतान हो रहा है। इसी भुगतान के बीच हर महीने लाखों और साल भर में करोड़ों की धांधली का आरोप है।

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