पश्चिमी उत्तर प्रदेश का स्क्रैप माफिया रवि काना उर्फ रवि नागर बांदा जेल से बाहर आते ही लापता हो गया है. रवि काना का लापता होना इसलिए भी गंभीर हो गया है, क्योंकि इसके खिलाफ नोएडा कोर्ट से बी वारंट जारी था. हैरान करने वाली बात यह है कि कोर्ट की बिना अनुमति के ही रवि काना को बांदा जेल से रिहा कर दिया गया. हालांकि इस मामले में बांदा जेल अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है. विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. स्क्रैप माफिया रवि काना के लापता होने के बाद नोएडा पुलिस अलर्ट मोड पर है. नोएडा पुलिस की पांच स्पेशल टीमें यूपी के 15 जिलों में दबिश दे रही हैं. पश्चिमी यूपी के कई जिलों के साथ-साथ नेपाल बॉर्डर पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है.

नोएडा पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती और सिरदर्द यह है कि आखिर जेल से रिहा होते ही रवि काना अचानक से कहां गायब हो गया? पश्चिमी यूपी के कई जिलों के साथ-साथ नेपाल बॉर्डर पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है. पुलिस को आशंका है कि रवि काना पश्चिमी यूपी में कहीं छिपा हो सकता है या फिर नेपाल के रास्ते देश से बाहर निकलने की कोशिश कर सकता है.

गैंगस्‍टर रवि काना बांदा की जेल में बंद था। नोएडा के सेक्‍टर 63 थाने में उसके खिलाफ जबरन वसूली और धमकी का केस दर्ज था। इस केस में कोर्ट ने बी वॉरंट जारी किया था।

Chief Judicial Magistrate गौतम बुद्ध नगर की कोर्ट ने पूछा कि आखिर आरोपी रवि काना को B warrant के तहत पेश किया जाना था, लेकिन इसके बावजूद वह बिना किसी न्यायिक आदेश के जेल से कैसे रिहा हो गया? इस मामले में कोर्ट में बांदा जेल अधीक्षक से जवाब तलब किया था. मामला तूल पकड़ने के बाद बांदा जेल अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया. उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए.

नोएडा पुलिस के अनुसार, रवि काना संगठित अपराध गिरोह का लीडर है. इसका गैंग नंबर डी-190 है. इस गैंग में 18 अन्य लोग भी शामिल हैं. मुख्य सरगना रवि काना ही है. गैंग के अन्य सदस्यों के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर समेत दिल्ली-NCR में दर्जन भर आपराधिक केस दर्ज हैं. जांच में यह भी सामने आया कि यह गैंग अवैध तरीके से सरिया और स्क्रैप कारोबार से जुड़ा था. इसके गैंग के एक इशारे पर किसी भी कंपनी या फिर सरिया के बड़े-बड़े गोदाम पर स्क्रैप का टेंडर किसी और को नहीं देने दिया जाता था. ज्यादातर कंपनियां रवि काना गैंग को ही अपना स्क्रैप देती थीं.

रवि काना और इसके परिवार के सदस्यों के नाम पर आधा दर्जन कंपनियां हैं. करोड़ों रुपए की अवैध संपत्ति है. नोएडा पुलिस ने कार्रवाई के दौरान दर्जनों वाहन, बैंक खातों में जमा रकम, औद्योगिक भूखंडों पर कुर्की की कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई से रवि काना की कमर टूटी, लेकिन फिर भी अलग-अलग जगहों पर इसके गुर्गे अब भी अपराधिक गतिविधियों की कमान संभाले हुए हैं.

रवि काना के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर समेत कई जिलों के अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, धोखाधड़ी, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट के कुल 29 केस दर्ज हैं. वहीं गैंग के 18 लोगों के खिलाफ भी अलग-अलग थानों में 131 मामले दर्ज हैं.

नोएडा पुलिस में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, रवि काना ने एक मामले में अग्रिम जमानत लेते समय न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन किया था. पासपोर्ट जाम न कर अपनी गलफ्रेंड के साथ एक जनवरी 2024 को विदेश फरार हो गया था. इसके बाद रवि काना के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया. 24 अप्रैल 2024 को उसे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

कोर्ट का कहना है कि जब बांदा जेल प्रशासन को पहले से जानकारी थी कि आरोपी बी वारंट पर है तो ऐसे में उसे रिहा करना न्‍यायिक आदेशों की अवहेलना है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण की जिम्‍मेदारी डीआईजी जेल और डीजी जेल को भेजी है।

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