राहुल परमार, देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के ग्राम बांगर स्थित प्रतिष्ठित अमलतास अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। अस्पताल के अपशिष्ट और गंदे पानी के अवैध निस्तारण को लेकर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा रात के समय प्लांट से गंदा पानी खेतों में छोड़ा जा रहा है, जो बहते-बहते प्राचीन और प्रसिद्ध श्री दत्त मंदिर के मैदान तक पहुंच रहा है। मौके पर खेतों और मंदिर परिसर के आसपास दूषित पानी का जमाव साफ तौर पर देखा जा सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है।

8 साल से जारी है समस्या

प्राचीन श्री दत्त मंदिर के पुजारी श्रीपाद कुलकर्णी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पिछले करीब आठ वर्षों से रुक-रुक कर यह सिलसिला लगातार जारी है और कई बार शिकायतें करने के बावजूद इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मंदिर परिसर में बोरिंग भी मौजूद है। आने वाले दिसंबर महीने में दत्त जयंती के अवसर पर यहाँ एक विशाल भंडारे का आयोजन होने वाला है, जिसमें देश भर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में जमा हो रहे अपशिष्ट पानी से भूजल और बोरिंग के पानी की गुणवत्ता के अत्यधिक प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

क्षिप्रा नदी की स्वच्छता पर भी लग रहे ग्रहण

इस पूरे मामले का एक अन्य बेहद संवेदनशील पहलू पवित्र क्षिप्रा नदी की स्वच्छता से भी जुड़ा हुआ है। जानकारी सामने आ रही है कि अस्पताल के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी ग्राम पुआल्डा के आगे नागधम्मन नदी में छोड़ा जा रहा है, जहाँ से आगे चलकर यह गंदा पानी अन्य औद्योगिक अपशिष्टों के साथ मिलकर क्षिप्रा नदी तक पहुंच जाता है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या अमलतास अस्पताल के एसटीपी में निकलने वाले अपशिष्ट पानी का उपचार निर्धारित मानकों के तहत किया जा रहा है? क्या नदी में मिलने वाले इस पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच हो रही है? एक तरफ जहाँ आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए क्षिप्रा नदी को पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल बनाने के बड़े-बड़े प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं इस तरह की लापरवाही नदी के अस्तित्व पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।

प्रबंधन ने साधी चुप्पी

इस पूरे गंभीर मामले पर जब मीडिया द्वारा अमलतास अस्पताल प्रबंधन से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी एक-दूसरे का नाम आगे बढ़ाते हुए नजर आए और किसी भी तरह का स्पष्ट या संतोषजनक जवाब देने से बचते दिखे।

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