Lalluram Desk. धनतेरस आज यानी 6 नवंबर शुक्रवार को जा रहा है। इसी के साथ पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का शुभारंभ होगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व का भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर से विशेष संबंध है। धनतेरस पर यमराज के निमित्त दीपदान करने का भी विशेष विधान है। इसे यम का दीपक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक यम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। उनकी लंबी आयु की कामना की जाती है।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10: 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:2 मिनट से रात 7:57 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जा सकती है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5: 33 मिनट से रात 8:9 मिनट तक रहेगा। यम दीपदान के लिए प्रदोष काल का समय विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है।

स्कंद पुराण में बताया गया है यम दीपदान का महत्व

स्कंद पुराण के कार्तिक माहात्म्य में यम दीपदान से जुड़ा एक प्रसंग मिलता है। इसके अनुसार, एक बार यमराज के दूतों ने उनसे प्रश्न किया कि मनुष्य को अकाल मृत्यु के भय से बचाने वाला कौन सा धार्मिक कार्य है। इस पर यमराज ने कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को संध्या के समय अपने निमित्त दीपदान करने का विधान बताया। इसी प्रसंग से धनतेरस की शाम यमराज के नाम एक दिया जलाने की धार्मिक रीति जुड़ी है। इस दिन दीपदान करते समय परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना करे।

गेहूं के आटे से तैयार करें चौमुखी दीपक

यम दीपदान के लिए गेहूं के आटे से चौमुखी दीपक तैयार करें। इसके लिए आटे में थोड़ा पानी मिलाकर दीप का आकार बना लें। दीपक में सरसों का तेल भरकर रुई की चार बत्तियां लगाए। इसके साथ कुछ काले तिल भी डाले जाते हैं। दिया तैयार करते समय ध्यान रखें कि उसकी चारों बत्तियां अच्छी तरह व्यवस्थित हों, ताकि दीपक प्रज्वलित करने में परेशानी न हो। पूजा के लिए दीपक तैयार करने के बाद संध्या के समय इसे जलाया जाता है।

दक्षिण दिशा की ओर रखें यम दीपक

यमराज को दक्षिण दिशा का अधिपति कहा गया है। इसलिए यम दीपदान करते समय दक्षिण दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखा जाता है। दीपक जलाते समय परिवार के सभी सदस्यों की अच्छी सेहत, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यमराज से परिवार की रक्षा और मंगल जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है।

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