प्रयागराज में साइबर ठगों ने मुंबई पुलिस और कूरियर कर्मी बनकर एक महिला को 36 दिनों तक डराया और उससे 1.78 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए. पुलिस ने मामले में लखीमपुर खीरी निवासी आयुष अवस्थी को गिरफ्तार कर करीब 64.61 लाख रुपये की संपत्ति बरामद और फ्रीज कराई है.

प्रयागराज. जॉर्जटाउन क्षेत्र में एक महिला से 36 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.78 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह के एक मुख्य सदस्य को गिरफ्तार किया है. प्रयागराज पुलिस ने आरोपी आयुष अवस्थी को लखीमपुर खीरी स्थित उसके गांव से पकड़ा है. पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे और उसके बैंक खातों से करीब 64.61 लाख रुपये की संपत्ति बरामद और फ्रीज कराई गई है.

36 दिन तक डराया

पुलिस उपायुक्त सोनम कुमार के मुताबिक पीड़ित महिला किरन कला ने 1 अक्टूबर को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. महिला ने बताया कि 26 अगस्त को एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसमें फोन करने वालों ने खुद को मुंबई पुलिस और कूरियर कर्मचारी बताया.

ठगों ने महिला को बताया कि उसके नाम से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स और पहचान पत्र मिले हैं. इसके बाद उसे जेल भेजने की धमकी दी गई और लगातार डर के माहौल में रखा गया.

अलग-अलग खातों में रकम

पुलिस के अनुसार साइबर ठगों के दबाव में महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1,78,60,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने रकम के लेनदेन और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच शुरू की.

जांच में ठगी की रकम का एक हिस्सा लखीमपुर खीरी निवासी आयुष अवस्थी के खाते में पहुंचने की जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया.

एलएलबी पास है आरोपी

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि आयुष अवस्थी एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुका है और कोचिंग संस्थानों में पढ़ा भी चुका है. पुलिस के मुताबिक कारोबार में नुकसान होने के बाद वह 10 प्रतिशत कमीशन के लालच में साइबर गिरोह से जुड़ गया.

जांच के दौरान गिरोह के दूसरे राज्यों में भी सक्रिय होने की जानकारी सामने आई. पुलिस के अनुसार गिरोह ने उत्तराखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में लोगों को निशाना बनाकर 3.80 करोड़ रुपये की ठगी की है.

दो आरोपियों की तलाश

मामले में निशांत त्रिवेदी और राजन शुक्ला नाम के दो अन्य आरोपी फरार बताए गए हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें अलग-अलग स्थानों पर दबिश दे रही हैं.

प्रकरण का सफल अनावरण करने वाली पुलिस टीम को पुलिस आयुक्त की ओर से 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया है. पुलिस ने लोगों को स्पष्ट किया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई व्यवस्था नहीं है.

पुलिस ने अपील की है कि इस तरह की धमकी या साइबर ठगी से जुड़ी कॉल आने पर घबराएं नहीं और तत्काल 1930 पर इसकी सूचना दें.