Business Desk : Digital Gold में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। सितंबर 2026 में भारतीयों ने डिजिटल गोल्ड में ₹2,590 करोड़ की खरीदारी की। यह पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 83% ज्यादा है। जनवरी से सितंबर के बीच डिजिटल गोल्ड की खरीद 76% बढ़कर 16.3 टन पहुंच गई। हालांकि, इसकी बढ़ती लोकप्रियता के बीच SEBI ने निवेशकों को इसके जोखिमों को लेकर आगाह भी किया है।
9 महीने में डिजिटल गोल्ड की खरीद 76% बढ़ी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारत में डिजिटल गोल्ड की कुल खरीद 16.3 टन रही। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 9.2 टन था। यानी एक साल में डिजिटल गोल्ड की खरीद में 76% की बढ़ोतरी हुई है।
सितंबर में ही डिजिटल गोल्ड की खरीद सालाना आधार पर 83% बढ़कर ₹2,590 करोड़ पहुंच गई। इस दौरान लोगों ने करीब 1.7 टन सोना खरीदा। सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद छोटी रकम से निवेश की सुविधा के कारण लोग इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
क्या है Digital Gold और कैसे खरीदते हैं?
Digital Gold में सोना ऑनलाइन खरीदा जाता है। इसके लिए ज्वेलरी की दुकान पर जाने या सोने के सिक्के और बार घर लाने की जरूरत नहीं होती। मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छोटी रकम से भी सोना खरीदा जा सकता है।
खरीदी गई सोने की मात्रा आपके अकाउंट में दर्ज होती है। प्लेटफॉर्म के मॉडल के मुताबिक, इसके बदले फिजिकल सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर निवेशक इसे ऑनलाइन बेच सकते हैं।
कुछ प्लेटफॉर्म पर सिक्के और बार के रूप में डिलीवरी लेने का विकल्प भी मिलता है। हालांकि, डिलीवरी की सुविधा और उससे जुड़े चार्ज अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग हो सकते हैं।
छोटी रकम से निवेश करना बना लोकप्रियता की वजह
डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता बढ़ने की बड़ी वजह इसमें कम रकम से खरीदारी की सुविधा है। फिजिकल गोल्ड खरीदने के लिए एक साथ ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छोटी रकम से भी सोना खरीदा जा सकता है।
इसके अलावा सोने को घर में रखने, लॉकर की व्यवस्था करने और उसकी सुरक्षा की चिंता भी नहीं रहती। मोबाइल से खरीदारी और बिक्री की सुविधा ने इसे नए निवेशकों के लिए आसान विकल्प बनाया है।

Digital Gold पर SEBI ने क्यों दी चेतावनी?
डिजिटल गोल्ड की खरीद बढ़ने के बीच बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 8 नवंबर 2025 को निवेशकों को सावधान किया था। SEBI ने कहा था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले डिजिटल गोल्ड और ई-गोल्ड प्रोडक्ट उसके नियामकीय दायरे में नहीं आते।
नियामक के मुताबिक, ये प्रोडक्ट न तो सिक्योरिटीज के तौर पर अधिसूचित हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के रूप में रेगुलेटेड हैं। ऐसे निवेश में काउंटरपार्टी और ऑपरेशनल जोखिम हो सकते हैं। SEBI ने यह भी स्पष्ट किया था कि इन प्रोडक्ट में निवेश करने वालों को शेयर बाजार के तहत मिलने वाली निवेशक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलेगा।
Digital Gold और Gold ETF में क्या अंतर है?
डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF दोनों के जरिए सोने में निवेश किया जा सकता है, लेकिन इनके नियम अलग हैं। डिजिटल गोल्ड आमतौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदा जाता है और SEBI के नियामकीय दायरे में नहीं आता।
वहीं, गोल्ड ETF म्यूचुअल फंड की ओर से जारी किए जाते हैं और SEBI के नियमों के तहत आते हैं। इनमें निवेश के लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। SEBI ने निवेशकों को रेगुलेटेड गोल्ड प्रोडक्ट के तौर पर गोल्ड ETF और एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाले अन्य विकल्पों के बारे में जानकारी दी है।
डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सोने की शुद्धता, स्टोरेज की व्यवस्था और बिक्री या डिलीवरी से जुड़े नियम समझना जरूरी है। यह भी जांचें कि खरीद और बिक्री पर कितना शुल्क लगेगा और जरूरत पड़ने पर सोना वापस लेने की क्या शर्तें हैं।
सिर्फ ऐप पर सोने की कीमत दिखने का मतलब यह नहीं है कि निवेश पूरी तरह जोखिम-मुक्त है। SEBI की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए निवेशक डिजिटल गोल्ड और रेगुलेटेड गोल्ड विकल्पों के बीच अंतर समझकर ही फैसला लें।

