पटना। बिहार के प्रमुख छात्र नेता दिलीप कुमार ने राज्य के शिक्षकों के 7वें वेतनमान, पुरानी पेंशन योजना और स्वैच्छिक स्थानांतरण (ट्रांसफर) की मांगों को अपना पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार लगातार शिक्षकों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों का समाधान नहीं निकाला, तो वे शिक्षकों के साथ मिलकर एक बड़ा जन-आंदोलन करेंगे।
सरकार पर वादाखिलाफी और अनदेखी का आरोप
दिलीप कुमार ने कहा कि शिक्षक समाज और देश के भविष्य का निर्माण करते हैं, लेकिन वर्तमान सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दल शिक्षकों से बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही उन्हें भूल जाते हैं।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों के स्वैच्छिक स्थानांतरण जैसे बुनियादी मुद्दे पर भी सरकार सिर्फ बहानेबाजी कर रही है। दिलीप कुमार ने याद दिलाया कि वे पहले भी ‘समान काम के लिए समान वेतन’ और शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने वाले आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
11 सालों का संघर्ष और उपलब्धियां
पिछले 11 वर्षों से बिहार के छात्रों और युवाओं के हक के लिए संघर्षरत दिलीप कुमार ने कहा कि उनके आंदोलनों की वजह से कई परीक्षाओं में हुई धांधली उजागर हुई और परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। इनमें बीपीएससी 67वीं सिविल सेवा परीक्षा और शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) का पेपर लीक मामला प्रमुख है।
इसके अलावा, TRE-4 का विज्ञापन जारी कराने, 18 सालों से लंबित लाइब्रेरियन बहाली शुरू कराने, बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिलाने तथा महिला व दिव्यांग आरक्षण के अधिकार दिलाने के लिए भी उन्होंने लगातार आवाज उठाई है।
शिक्षकों से एकजुटता की अपील और राजनीतिक सफर
दिलीप कुमार ने शिक्षकों से अपनी मांगों के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे स्वयं शिक्षक की नौकरी छोड़कर बिना किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन के युवाओं और शिक्षकों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
दिलीप कुमार दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय) से निर्दलीय एमएलसी (MLC) प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। मतपत्र पर उनका क्रमांक 21 है। उन्होंने 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मतदाताओं से प्रथम वरीयता का वोट देने की अपील की है ताकि वे सदन में शिक्षकों और युवाओं की आवाज मजबूती से उठा सकें।

