अनिल मालवीय, सीहोर। शहरवासियों को घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाल रही नगर पालिका की जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के वार्ड क्रमांक 10, 12 और 23 सहित कई रिहायशी इलाकों में नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आने की शिकायतें सामने आई हैं। रहवासियों का आरोप है कि कई दिनों से जारी इस समस्या के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है। ऐसे में सवाल है कि आखिर लोगों की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी ठोस कार्रवाई कब करेंगे?
नलों में साफ पानी की जगह गंदगी, रहवासियों में नाराजगी
शहर के फ्रीगंज, संजय नगर और मंडी क्षेत्र के रहवासियों के मुताबिक, नल खोलने पर साफ पानी के बजाय मटमैला और दुर्गंधयुक्त पानी मिल रहा है। स्थानीय नागरिक आरिफ खान, दीदार खान, सोरमबाई गिरी, शिवनारायण वर्मा और अशोक वर्मा सहित अन्य लोगों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि समस्या को केवल कुछ मिनट की घटना बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जब घरों में आने वाला पानी ही संदिग्ध हो, तो परिवारों के सामने पीने और दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित पानी जुटाने की चुनौती खड़ी हो जाती है।
सीवेज चैंबर से गुजरती पाइपलाइन, लीकेज की आशंका ने बढ़ाई चिंता
दूषित पानी की शिकायतों के बीच पेयजल पाइपलाइन के सीवेज चैंबर से गुजरने का मुद्दा भी सामने आया है। यदि ऐसी जगह पाइपलाइन में लीकेज या जोड़ में खराबी है, तो गंदे पानी के पेयजल लाइन में प्रवेश करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रहवासियों ने पाइपलाइन की स्थिति से जुड़े फोटो और वीडियो अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है। अब जरूरी है कि नगर पालिका मौके पर पहुंचकर पाइपलाइन, जोड़, वाल्व और आसपास के सीवेज चैंबर की तकनीकी जांच कराए। केवल जलशोधन संयंत्र की रिपोर्ट के आधार पर घरों तक पहुंच रहे पानी को सुरक्षित मान लेना पर्याप्त नहीं होगा।
सीएमओ का दावा-टंकी सूखने से कुछ मिनट आया गंदा पानी
मामले में नगर पालिका सीएमओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पानी की टंकी सूख गई थी और उसकी सफाई के दौरान करीब पांच से सात मिनट तक गंदा पानी आया था। उनके अनुसार, अब पानी साफ होने की रिपोर्ट मिल चुकी है। हालांकि, रहवासियों की शिकायतों और सीएमओ के इस दावे के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। यदि समस्या वास्तव में कुछ मिनट तक सीमित थी, तो अलग-अलग इलाकों से लगातार शिकायतें आने की वजह क्या है? इसका जवाब मौके की जांच और संबंधित क्षेत्रों से लिए गए पानी के नमूनों की रिपोर्ट से ही सामने आ सकेगा।
इंदौर जैसी त्रासदी का सबक, सीहोर में लापरवाही की गुंजाइश नहीं
दूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों और जनहानि की घटनाएं पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि जलापूर्ति में छोटी दिखने वाली तकनीकी खामी भी गंभीर परिणाम ला सकती है। सीहोर में भी प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार किए बिना शिकायतों की जांच करनी चाहिए। दूषित पानी के सेवन से उल्टी-दस्त सहित कई संक्रमणों का खतरा हो सकता है। इसलिए प्रभावित इलाकों में तत्काल सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था, पाइपलाइन की जांच और जरूरत पड़ने पर पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जानी चाहिए।
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