Diwali 2026: दीपों के इस महापर्व पर घरों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। हिंदू संस्कृति में दिवाली की रात को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है। आज प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त के अनुसार माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करेंगे। घर के मुख्य द्वार से लेकर आंगन तक दीप जलाकर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। दिवाली की रात देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करना भी शुभ होता है। मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और मनुष्य अपने परिवार की उन्नति, आर्थिक संपन्नता तथा सुखद भविष्य की प्रार्थना करता है। ऐसे में आज रात पूजा के बाद इन चार मंत्रों का जाप जरूर करें।

- गणपति मंत्र
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। दिवाली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है। उनकी आराधना से जीवन की बाधाओं को दूर करने और शुभ कार्यों में सफलता की कामना की जाती है। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करके बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद मांगें।
मंत्र : ओम गं गणपतये नमः।
- माता लक्ष्मी का मंत्र
दिवाली पर धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की आराधना का बहुत खास महत्व रहता है। आज रात पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करें। इसके माध्यम से मां लक्ष्मी से घर में धन-धान्य की वृद्धि, आर्थिक उन्नति और परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करें।
मंत्र : ओम श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
- भगवान कुबेर का मंत्र
धन के देवता भगवान कुबेर धन-संपत्ति और समृद्धि के अधिपति है। दिवाली की रात इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करके भगवान कुबेर से घर में धन-धान्य, संपन्नता और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करें।
मंत्र : ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।
- माता सरस्वती का मंत्र
दिवाली की रात माता सरस्वती की आराधना कर परिवार के बच्चों की शिक्षा, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करें। सरस्वती जी ज्ञान, विद्या, बुद्धि और वाणी की देवी हैं। इस मंत्र का जाप विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।
मंत्र : ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
मंत्र जाप करते समय रखें ध्यान
आज दिवाली की रात माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद साफ आसन पर बैठकर इन मंत्रों का जाप करें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक मंत्र का 11, 21 या 108 बार उच्चारण करें। जाप के दौरान मन को शांत रखें और मंत्रों का स्पष्ट उच्चारण करें।
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