Diwali 2026: दिवाली का पर्व आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। इस दिन घरों में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ धन के देवता कुबेर की आराधना भी की जाएगी। वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में नए बही-खातों की पूजा यानी चोपड़ा पूजन का विशेष महत्व रहेगा। पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न को सबसे शुभ माना गया है। रात में निशिता काल में विशेष साधना और पश्चिम बंगाल में मां काली की पूजा होगी। ऐसे में घर से लेकर व्यापारियों तक के लिए अलग-अलग पूजा मुहूर्त बताए गए हैं।

दिवाली का पर्व रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन घरों में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ धन के देवता कुबेर की आराधना भी की जाएगी। वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में नए बही-खातों की पूजा यानी चोपड़ा पूजन का विशेष महत्व रहेगा। पूजा के लिए प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न को सबसे शुभ माना गया है। रात में निशिता काल में विशेष साधना और पश्चिम बंगाल में मां काली की पूजा होगी। ऐसे में घर से लेकर व्यापारियों तक के लिए अलग-अलग पूजा मुहूर्त बताए गए है।
वृषभ लग्न लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सबसे शुभ है
दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का संयोग रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय गणना में वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। मान्यता है कि इस समय मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
व्यापारियों के लिए चोपड़ा पूजन का मुहूर्त
दिवाली पर व्यापारी वर्ग अपनी दुकानों, प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में नए बही-खातों की पूजा करता है। गुजरात में इसे चोपड़ा पूजन और शारदा पूजन के नाम से भी जाना जाता है। व्यापारियों के लिए कुंभ लग्न दोपहर 1:27 बजे से 2:54 बजे तक रहेगा। इस दौरान नए बही-खातों, तिजोरी, कैश काउंटर और व्यापार में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा की जा सकती है। बही-खातों पर स्वास्तिक बनाकर शुभ-लाभ लिखने और भगवान गणेश, मां लक्ष्मी तथा मां सरस्वती का स्मरण करने की परंपरा है।
निशिता काल में होगी विशेष साधना
दिवाली की रात निशिता मुहूर्त रात 11:39 बजे से देर रात 12:32 बजे तक रहेगा। यह समय विशेष तांत्रिक साधना, मंत्र जाप और रात्रिकालीन अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कुछ साधक मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विशेष आराधना भी करते हैं।
मां काली की पूजा
दिवाली की रात पश्चिम बंगाल में मां काली की आराधना का विशेष महत्व है। यहां दीपावली को काली पूजा या श्यामा पूजा के रूप में मनाया जाता है। मां काली की पूजा मध्यरात्रि 11:41 बजे से रात 12:29 बजे के बीच की जाएगी। इस दौरान मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष अनुष्ठान होंगे। मां को लाल गुड़हल के फूल, मिठाई और पारंपरिक भोग अर्पित किया जाएगा।
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