Diwali : दिवाली का पर्व माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि, खुशहाली और आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। दीपोत्सव की रात घर के मुख्य द्वार, आंगन, पूजा स्थल और छत पर दीपों की कतार सजाई जाती है। इस रात तुलसी, शमी और आंवले के वृक्ष के नीचे दीपदान करने का भी विधान है। इन तीनों पवित्र वृक्षों के समीप दीपक जलाकर देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रार्थना की जाती है। दिवाली की रात 10:30 बजे से 11:30 बजे तक के एक घंटे के समय में दीपदान जरूर करें।

प्रत्येक दीपक में शुद्ध देसी घी भरें। इसके बाद तीनों दीपकों में थोड़ी-थोड़ी मिश्री और एक-एक काला कमलगट्टा डालें। अब दीपक जलाने से पहले हाथ जोड़कर माता लक्ष्मी का स्मरण करें। मन में परिवार की सुख-शांति, आर्थिक उन्नति और जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करें। दीपक प्रज्वलित करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें।

पहला दीपक

दिवाली की रात सबसे पहले घर के मुख्य द्वार या आंगन में स्थापित तुलसी के पौधे के नीचे दीपक रखें। हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत पवित्र स्थान प्राप्त है। इसका संबंध माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से भी जोड़ा जाता है। तुलसी के समीप घी का दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली और घर में धन-धान्य की वृद्धि की प्रार्थना करें। दीपदान के समय तुलसी के पौधे के आसपास साफ-सफाई रखें।

दूसरा दीपक

दूसरा दीपक शमी के पौधे के नीचे प्रज्वलित करें। शमी का संबंध शनिदेव से बताया गया है। शमी वृक्ष की पूजा में दीपदान का भी विधान है। दीपक जलाते समय शनिदेव का स्मरण करें और परिवार के सदस्यों के जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत की प्रार्थना करें। यदि घर के आसपास शमी का पेड़ उपलब्ध नहीं है तो किसी स्वच्छ स्थान पर दीपक रखकर शमी वृक्ष का ध्यान कर सकते हैं।

तीसरा दीपक

तीसरा दीपक आंवले के पेड़ के नीचे रखें। धार्मिक परंपरा में आंवले का संबंध भगवान विष्णु से जोड़ा गया है। इस वृक्ष के समीप दीप प्रज्वलित करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें। परिवार में सुख-समृद्धि, व्यापार में उन्नति और आर्थिक परेशानियों से राहत की प्रार्थना करें। आसपास आंवले का पेड़ नहीं होने पर किसी स्वच्छ स्थान पर दीपक रखकर आंवले के वृक्ष का ध्यान कर सकते हैं।

इस प्रकार दिवाली की रात तुलसी, शमी और आंवले के नीचे तीन दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक दीपदान करें। अंत में माता लक्ष्मी के सामने हाथ जोड़कर परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना करें।

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